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किसे

कोई व्यक्ति या किसी चीज़ को, किसको

किसा

चादर

किसी

' कोई ' का वह रूप जो उसे विभवति लगने पर प्राप्त होता है

कैसे

किस अभिप्राय या उद्देश्य से, किस लिए क्यों, जैसे-कैसे आना हुआ

कैसा

किस आकार या रंग-रूप का।

कैसी

क्या

किसी को

किसी एक मार्ग पर, समझे-बूझे व्यक्ति को, प्रिय को

किसी का

(کنایۃً) معشوق کا

क़िस्सा

ककड़ी, खीरा

क़िस्सा

कथा, आख्यान, दास्ताँ, कहानी, अफ़साना

क़िस्सा

कथा, आख्यान, दास्ताँ, कहानी, अफ़साना

कशा

लकड़ी या धात का छोटा टुकड़ा जिसे किताब पर निशान के तौर पर रखते हैं

कशी

रेशम जिस से कढ़ाई की जाती है

कैसे हो

क्या हाल है, मिज़ाज कैसा है

कैसा ही

howsoever, of whatsoever sort, in whatsoever manner

किसू

किसी, कोई व्यक्ति जिसके नाम का उल्लेख नहीं हो और उसकी तरफ़ इशारा हो

कैसी ही

कितनी ही, कितनी भी, चाहे जिस तरह की

कैसी-हो

बहुत बुरा हो, बुरा नतीजा हो, तमाशा हो

का सा

like, resembling

किसी से

from anyone

कैसी धड़ पट उड़ी

ज़लील हुआ, ख़ूब पीटा

दाना खाय न पानी पीवे, वह आदमी कैसे जीवे

कोई खाए पिए बिना कैसे जीवित रह सकता है

लड़की तेरा ब्याह कर दें, कहा मैं कैसे कहूँ

जहाँ किसी चीज़ की इच्छा हो परंतु कह न सकें वहाँ बोलते हैं

किसी के टुकड़ों पर पड़ना

sponge on

किसी चीज़ का धुवाँ उड़ाना

किसी चीज़ को ख़ाक में मिलाना, आग में झोंकना, किसी चीज़ को धुआँ धुआँ कर देना

खाएँ कसी का गाएँ कसी को

एहसान कोई करे और शुक्रगुज़ारी किसी की करें

किसी से साई कसी को बधाई

उस व्यक्ति के बारे में बात करते हैं जो प्रतिज्ञा तोड़ता है और झूठ बोल कर काम किसी और के लिए करता है

दाना न खाए , न पानी पीवे , वो आदमी कैसे जीवे

जो खाए पीए नहीं वो कैसे ज़िंदा रह सकता है, जो रंज-ओ-ग़म की वजह से खाना पीना छोड़ दे ऐसे शख़्स को कहते हैं

आध पाव के पात्र में कैसे सेर समाय

असंभव काम संभव कैसे हो सकता है

सिवय्याँ बिन 'ईद कैसी

ख़ुशी ही की तक़रीब में ख़ुशी अच्छी मालूम होती है, ख़ुशी की तक़रीब बगै़र पकवान के फीकी मालूम होती है

क़द्र-ए-'आफ़ियत कसे दानद कि मुसीबते गिरफ़्तार आयद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) अच्छाई की क़दर वो जानता है जो किसी मुसीबत में गिरफ़्तार होचुका हो

किसे पड़ी है

none is concerned with, none is desirous of, nobody cares

जो कोई कलपाय है वो कैसे कल पाय है

जो लोगों को सताता है उसे कभी शांति नहीं मिलती

जीवड़ा कैसा है

स्वभाव कैसा है

कैसी धरपट उड़ी

ख़ूब पिटा, अपमानित किया गया, ज़लील हुआ

सेवईयों बिन ईद कैसी

ईद के दिन मुसलमान सेवईयाँ पका कर खाते हैं, इस के बिना ईद मालूम नहीं होती

किसी की धूल उड़ा देना

मिस्मार और बर्बाद कर देना, ख़ाक में मिला देना, मलियामेट कर देना, गर्द बार कर देना

हर रोज़ 'ईद नीस्त कि हल्वा ख़ूरद कसे

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) हर रोज़ ईद नहीं है कि कोई हलवा खाए , रोज़ रोज़ उम्दा मौक़ा हाथ नहीं आता , हर रोज़ ख़ुशी हासिल नहीं होती, ज़माना एक सा नहीं रहता, (बिलउमूम ऐसे मौके़ पर मुस्तामल जब कोई एक बार कुछ पाने के बाद फिर फ़ायदे की उम्मीद रखे)

खाएँ किसी का गाएँ किसी का

एहसान कोई करे और शुक्रगुज़ारी किसी की करें

न दीद नक़्द बा नसबा कसे

कोई नक़द के बदले उधार नहीं देता

साँझ जाए और भोर आए , वो कैसे न छिनाल कहलाए

जो औरत शाम को जाये और सुबह को आए वो बदचलन समझी जाती है जो सरीहन बद हो उसे बद ही कहा जाएगा

किसी के मुँह पर चढ़ना

किसी के बराबर होना, सामना करना

किसी चीज़ के लिए कोई चीज़ छोड़ना

Abandon something in favour of something

कैसी मस्जिद कैसा मंदिर जो देखो वो दिल के अंदर

ये वहदत वजूद वालों का क़ौल है यानी दिल में सब कुछ मौजूद है

बाँस चढ़ी तो अब घूँगट कैसा

अपनी बेपर्दगी पर घूंघट या इज़्ज़त को कहाँ तक सँभालेगा, बेपर्दा होने पर घूंगट और इज़्ज़त क़ायम नहीं रह सकती

सेंदूर न लगाएँ तो भटार का मन कैसे रखें

बताओ यदि श्रंगार न करें तो पति को कैसे ख़ुश करें

किसी तरह किसी उनवान

किसी पहलू, किसी तौर

हर कसे मस्लहत-ए-ख़्वेश नको मी दानद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में प्रयुक्त) अपनी मस्लिहत हर शख़्स ख़ूब जानता है

सेंदूर न लगाएँ तो भतार का मन कैसे रखें

बताओ यदि श्रंगार न करें तो पति को कैसे ख़ुश करें

तीन दिये तेरह पाए, कैसे लोभ ब्याज का जाए

सूद ख़ोरों पर व्यंग है कि तीन दे के तेरह वसूल करते हैं

तीन दिये तेरह पाए, कैसे बोझ ब्याज का जाए

सूद ख़ोरों पर व्यंग है कि तीन दे के तेरह वसूल करते हैं

कीसा में रूपया मुँह में गुड़

अगर आदमी के पास पैसा हो तो ज़िंदगी का लुतफ़ है, रुपया पास होता है तो दिल ताज़ा मुंह शीरीं रहता है

आध सेर के पात्र में कैसे सेर समाय

असंभव काम संभव कैसे हो सकता है

कोई किसी की आग में नहीं पड़ता

कोई शख़्स दूसरे की बला और मुसीबत अपने सर नहीं लेता

कौन किसी के आवे जावे दाना-पानी लावे

अतिथि भाग्य से आता है, जहाँ का दाना-पानी लिखा होता है वहीं जाता है

'ऐब-ए-ख़ुद हर कसे नमी बीनद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में प्रयुक्त) अपना दोष किसी को मालूम नहीं होता

हमाँ आश-दर-कासा शुद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) एक मुआमले का दूसरी बार पेश आना , मुआमला जूं का तूं रहे तो कहते हैं

किसी का लड़का कोई मन्नत माने

किसी के घर बच्चा हो कोई ख़ुशी करे, किसी का काम बने कोई ख़ुश हो

किसी के टुकड़ों पर पलना

बिना अधिकार के दूसरों की रोटियाँ खाना, ग़रीबी के कारण दूसरे की रोटियाँ खाना, दूसरे के घर खाना

किसी की आग में पड़ना

दूसरे शख़्स की मुसीबत अपने सर लेना और किसी मुसीबत में शरीक होना, हमदर्दी करना, दूसरे की मुसीबत में साथ देना

हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में ख़तरनाक के अर्थदेखिए

ख़तरनाक

KHatarnaakخَطَرناک

वज़्न : 1221

शब्द व्युत्पत्ति: ख़-त-र

ख़तरनाक के हिंदी अर्थ

फ़ारसी, अरबी - विशेषण

  • ख़तरा पैदा करने वाला, जान जोखिम में डालने वाला कार्य, जो ख़तरे से भरा हो, ख़तरे से युक्त, भयानक, भयंकर, अनिष्टकर, हौलनाक, डरावना
  • चिंतित, फ़िक्रमंद, आशंकामय
  • त्रुटीपूर्ण

शे'र

English meaning of KHatarnaak

Persian, Arabic - Adjective

خَطَرناک کے اردو معانی

  • Roman
  • Urdu

فارسی، عربی - صفت

  • جو خطرے سے بھرا ہوا ہو، خطرہ پیدا کرنے والا، پر خطر، خوفناک، ڈراؤنا
  • متردد، متفَکر
  • غلط

Urdu meaning of KHatarnaak

  • Roman
  • Urdu

  • jo Khatre se bhara hu.a ho, Khatraa paida karne vaala, puraKhtar, Khaufnaak, Daraavnaa
  • mutaraddid, mutafakkir
  • Galat

खोजे गए शब्द से संबंधित

किसे

कोई व्यक्ति या किसी चीज़ को, किसको

किसा

चादर

किसी

' कोई ' का वह रूप जो उसे विभवति लगने पर प्राप्त होता है

कैसे

किस अभिप्राय या उद्देश्य से, किस लिए क्यों, जैसे-कैसे आना हुआ

कैसा

किस आकार या रंग-रूप का।

कैसी

क्या

किसी को

किसी एक मार्ग पर, समझे-बूझे व्यक्ति को, प्रिय को

किसी का

(کنایۃً) معشوق کا

क़िस्सा

ककड़ी, खीरा

क़िस्सा

कथा, आख्यान, दास्ताँ, कहानी, अफ़साना

क़िस्सा

कथा, आख्यान, दास्ताँ, कहानी, अफ़साना

कशा

लकड़ी या धात का छोटा टुकड़ा जिसे किताब पर निशान के तौर पर रखते हैं

कशी

रेशम जिस से कढ़ाई की जाती है

कैसे हो

क्या हाल है, मिज़ाज कैसा है

कैसा ही

howsoever, of whatsoever sort, in whatsoever manner

किसू

किसी, कोई व्यक्ति जिसके नाम का उल्लेख नहीं हो और उसकी तरफ़ इशारा हो

कैसी ही

कितनी ही, कितनी भी, चाहे जिस तरह की

कैसी-हो

बहुत बुरा हो, बुरा नतीजा हो, तमाशा हो

का सा

like, resembling

किसी से

from anyone

कैसी धड़ पट उड़ी

ज़लील हुआ, ख़ूब पीटा

दाना खाय न पानी पीवे, वह आदमी कैसे जीवे

कोई खाए पिए बिना कैसे जीवित रह सकता है

लड़की तेरा ब्याह कर दें, कहा मैं कैसे कहूँ

जहाँ किसी चीज़ की इच्छा हो परंतु कह न सकें वहाँ बोलते हैं

किसी के टुकड़ों पर पड़ना

sponge on

किसी चीज़ का धुवाँ उड़ाना

किसी चीज़ को ख़ाक में मिलाना, आग में झोंकना, किसी चीज़ को धुआँ धुआँ कर देना

खाएँ कसी का गाएँ कसी को

एहसान कोई करे और शुक्रगुज़ारी किसी की करें

किसी से साई कसी को बधाई

उस व्यक्ति के बारे में बात करते हैं जो प्रतिज्ञा तोड़ता है और झूठ बोल कर काम किसी और के लिए करता है

दाना न खाए , न पानी पीवे , वो आदमी कैसे जीवे

जो खाए पीए नहीं वो कैसे ज़िंदा रह सकता है, जो रंज-ओ-ग़म की वजह से खाना पीना छोड़ दे ऐसे शख़्स को कहते हैं

आध पाव के पात्र में कैसे सेर समाय

असंभव काम संभव कैसे हो सकता है

सिवय्याँ बिन 'ईद कैसी

ख़ुशी ही की तक़रीब में ख़ुशी अच्छी मालूम होती है, ख़ुशी की तक़रीब बगै़र पकवान के फीकी मालूम होती है

क़द्र-ए-'आफ़ियत कसे दानद कि मुसीबते गिरफ़्तार आयद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) अच्छाई की क़दर वो जानता है जो किसी मुसीबत में गिरफ़्तार होचुका हो

किसे पड़ी है

none is concerned with, none is desirous of, nobody cares

जो कोई कलपाय है वो कैसे कल पाय है

जो लोगों को सताता है उसे कभी शांति नहीं मिलती

जीवड़ा कैसा है

स्वभाव कैसा है

कैसी धरपट उड़ी

ख़ूब पिटा, अपमानित किया गया, ज़लील हुआ

सेवईयों बिन ईद कैसी

ईद के दिन मुसलमान सेवईयाँ पका कर खाते हैं, इस के बिना ईद मालूम नहीं होती

किसी की धूल उड़ा देना

मिस्मार और बर्बाद कर देना, ख़ाक में मिला देना, मलियामेट कर देना, गर्द बार कर देना

हर रोज़ 'ईद नीस्त कि हल्वा ख़ूरद कसे

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) हर रोज़ ईद नहीं है कि कोई हलवा खाए , रोज़ रोज़ उम्दा मौक़ा हाथ नहीं आता , हर रोज़ ख़ुशी हासिल नहीं होती, ज़माना एक सा नहीं रहता, (बिलउमूम ऐसे मौके़ पर मुस्तामल जब कोई एक बार कुछ पाने के बाद फिर फ़ायदे की उम्मीद रखे)

खाएँ किसी का गाएँ किसी का

एहसान कोई करे और शुक्रगुज़ारी किसी की करें

न दीद नक़्द बा नसबा कसे

कोई नक़द के बदले उधार नहीं देता

साँझ जाए और भोर आए , वो कैसे न छिनाल कहलाए

जो औरत शाम को जाये और सुबह को आए वो बदचलन समझी जाती है जो सरीहन बद हो उसे बद ही कहा जाएगा

किसी के मुँह पर चढ़ना

किसी के बराबर होना, सामना करना

किसी चीज़ के लिए कोई चीज़ छोड़ना

Abandon something in favour of something

कैसी मस्जिद कैसा मंदिर जो देखो वो दिल के अंदर

ये वहदत वजूद वालों का क़ौल है यानी दिल में सब कुछ मौजूद है

बाँस चढ़ी तो अब घूँगट कैसा

अपनी बेपर्दगी पर घूंघट या इज़्ज़त को कहाँ तक सँभालेगा, बेपर्दा होने पर घूंगट और इज़्ज़त क़ायम नहीं रह सकती

सेंदूर न लगाएँ तो भटार का मन कैसे रखें

बताओ यदि श्रंगार न करें तो पति को कैसे ख़ुश करें

किसी तरह किसी उनवान

किसी पहलू, किसी तौर

हर कसे मस्लहत-ए-ख़्वेश नको मी दानद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में प्रयुक्त) अपनी मस्लिहत हर शख़्स ख़ूब जानता है

सेंदूर न लगाएँ तो भतार का मन कैसे रखें

बताओ यदि श्रंगार न करें तो पति को कैसे ख़ुश करें

तीन दिये तेरह पाए, कैसे लोभ ब्याज का जाए

सूद ख़ोरों पर व्यंग है कि तीन दे के तेरह वसूल करते हैं

तीन दिये तेरह पाए, कैसे बोझ ब्याज का जाए

सूद ख़ोरों पर व्यंग है कि तीन दे के तेरह वसूल करते हैं

कीसा में रूपया मुँह में गुड़

अगर आदमी के पास पैसा हो तो ज़िंदगी का लुतफ़ है, रुपया पास होता है तो दिल ताज़ा मुंह शीरीं रहता है

आध सेर के पात्र में कैसे सेर समाय

असंभव काम संभव कैसे हो सकता है

कोई किसी की आग में नहीं पड़ता

कोई शख़्स दूसरे की बला और मुसीबत अपने सर नहीं लेता

कौन किसी के आवे जावे दाना-पानी लावे

अतिथि भाग्य से आता है, जहाँ का दाना-पानी लिखा होता है वहीं जाता है

'ऐब-ए-ख़ुद हर कसे नमी बीनद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में प्रयुक्त) अपना दोष किसी को मालूम नहीं होता

हमाँ आश-दर-कासा शुद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) एक मुआमले का दूसरी बार पेश आना , मुआमला जूं का तूं रहे तो कहते हैं

किसी का लड़का कोई मन्नत माने

किसी के घर बच्चा हो कोई ख़ुशी करे, किसी का काम बने कोई ख़ुश हो

किसी के टुकड़ों पर पलना

बिना अधिकार के दूसरों की रोटियाँ खाना, ग़रीबी के कारण दूसरे की रोटियाँ खाना, दूसरे के घर खाना

किसी की आग में पड़ना

दूसरे शख़्स की मुसीबत अपने सर लेना और किसी मुसीबत में शरीक होना, हमदर्दी करना, दूसरे की मुसीबत में साथ देना

संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .

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