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क़ैस
लैला के 'आशिक़ मजनूं का असली नाम, दीवाना, आशिक़, प्रेमी
काश
इच्छा आदि की सूचना के लिए प्रयुक्त शब्द, जैसे- 'यदि ऐसा करता या होता' का व्यंजक, 'ख़ुदा करता या करे' आदि
किसी
' कोई ' का वह रूप जो उसे विभवति लगने पर प्राप्त होता है
कस
व्यक्ति, लोग, कोई, मज़बूत, ज़ोर
कश
तंबाकू; सिगरेट आदि के धुएँ का घूँट; दम; फूँक; खींच
क़िस
अनुमान लगाओ, अनुमान करो, तलाश करो, ढूंढ़ो, परिणाम निकालो
क़श
दुबलेपन के बाद मोटा होना, भलाई पानी।।
क़स्स
(لفظاً) سرِ سینہ ، وسطِ سینہ ؛ (علم تشریح) سینے کی ہڈی.
कीस
वह थैली जिसमें गर्भ-स्थित होता है
क़ास
कहानी कहने वाला, कथा सुनाने वाला
किसू
किसी, कोई व्यक्ति जिसके नाम का उल्लेख नहीं हो और उसकी तरफ़ इशारा हो
किसे
कोई व्यक्ति या किसी चीज़ को, किसको
काँस
A tall species of grass that grows luxuriantly on waste and sandy soils, Imperata spontanea
कैसे
किस अभिप्राय या उद्देश्य से, किस लिए क्यों, जैसे-कैसे आना हुआ
क़ैस-मशरब
عاشقانہ مزاج رکھنے والا ، قیس کا ہم مزاج ؛ مراد : عاشق .
क़ैस-ए-'आमिरी
मजनूँ- एक प्रसिद्ध अरबी कहानी का पात्र
किसी को
किसी एक मार्ग पर, समझे-बूझे व्यक्ति को, प्रिय को
कशाँ
खींचने वाला, लुभाने वाला, आकर्षण वाला, आचरण
कशी
रेशम जिस से कढ़ाई की जाती है
कशा
लकड़ी या धात का छोटा टुकड़ा जिसे किताब पर निशान के तौर पर रखते हैं
कशया
قابل تلفی، جوتلف یا ضائع ہو، تلف ہونےوالا
क़िस्सा
कथा, आख्यान, दास्ताँ, कहानी, अफ़साना
क़िस्सा
कथा, आख्यान, दास्ताँ, कहानी, अफ़साना
कैसी-हो
बहुत बुरा हो, बुरा नतीजा हो, तमाशा हो
क़िस 'अला हाज़ा
(अरबी फ़िक़रा उर्दू में मुस्तामल) उसी पर और चीज़ों को क़ियास करो, इसी से अंदाज़ा करो
कैसी ही
कितनी ही, कितनी भी, चाहे जिस तरह की
कैसा ही
howsoever, of whatsoever sort, in whatsoever manner
क़सम
ईश्वर को साक्षी मानकर कही जानेवाली बात
किस-लिए
क्यों, किस सबब से, किस ग़रज़ से, किस वजह से किस कारण से, किस उद्देश्य से, किस अभिप्राय से, किस प्रयोजन से. किस अधिकार से, किस स्वार्थ से
क़ाश-क़ाश
ٹکڑے ٹکڑے ، پھان٘ک پھانک.
किस जोड़ तोड़ में हो
किस फ़िक्र और तरद्दुद में लग रहे हो
किस जोड़ तोड़ में फिरते हो
किस फ़िक्र और तरद्दुद में लग रहे हो
किस शख़्स का मुँह देख के उठा हूँ
जब किसी दिन तकलीफों पर तकलीफें पेश आएं तो कहते हैं यानी सुबह पहले पहल किस मनहूस का मुँह देखा था
किस शख़्स का मुँह देख कर उठा हूँ
जब किसी दिन तकलीफों पर तकलीफें पेश आएं तो कहते हैं यानी सुबह पहले पहल किस मनहूस का मुँह देखा था
किस किस का मुंँह नहीं देखा
कई आदमियों से मदद माँगी, हर एक से सहायता चाही है
किस शुमार-ओ-क़तार में है
it has no standing, it is worthless
किस के कान में फ़रिश्ते ने नहीं फूँका
मुराद: हर शख़्स को ख़ुशफ़हमी होती है
किस के कान में फ़रिश्ते ने नहीं फूँका है
۔دیکھو فرشتے کا کان میں پھونکنا۔
किस पत्थर से सर फोड़ें
किस से फ़र्याद करें, जब कोई फ़र्याद सुनने वाला न हो तो कहते हैं
कस चड़ना
ताक़त पहुँचना, शक्ति देना, साहस देना