खोजे गए परिणाम
",irgI" शब्द से संबंधित परिणाम
देगी
(anything) cooked in cauldron
fore-edge
आगे निकला हुआ हाशिया या किनारा (ख़ुसूसन किताब के सफ़े का)
straight-edge
सीधे किनारे का पैमाना, रास्त गिर , सीध नापने के लिए ।
outside edge
(आईस असकीट) दोनों किनारे जिन के रुख़ बाहर की तरफ़ हूँ जब दोनों पांव मिले हूँ।
'ईद-गाह
वह स्थान जहाँ पर मुस्लिम लोग ईद के दिन एकत्र होकर नमाज़ पढ़ते हैं और ख़ुशियाँ मनाते हैं।
'ईद-गह
वह स्थान जहाँ पर मुस्लिम लोग ईद के दिन एकत्र होकर नमाज़ पढ़ते हैं और ख़ुशियाँ मनाते हैं।
हर-गह
'हरगाह' का लघु., दे. ‘हरगाह'।
मी'आद-गाह
अवधि बिताना, अवधि पूरी होना, मोहलत ख़त्म होना, वादा का वक़्त पूरा होना
रोगी
रोग से ग्रस्त व्यक्ति, कुष्ठरोगी
रंगी
ख़ैराबाद की मशहूर छींट का कपड़ा, कोई छिपा हुआ कपड़ा जिसका रंग निकल जाय
हाथ पाँव राँगा राँगा होना
हाथ पान॒ो शल होना, हाथ पान॒ो का बे-हिस-ओ-हरकत होना, पाथ पान॒ो में क़ुव्वत की कमी हो जाना
जिस ने कोड़ा दिया वो घोड़ा भी देगा
जिस ख़ुदा ने थोड़ा दिया है वो बहुत भी देगा
हाथ पाँव राँगा राँगा हुए जाते हैं
۔ہاتھ پاؤںشل ہوکر سرد ہوجانا کی جگہ۔(فقرہ) طبیعت اکتائی ہوئی ہاتھ پاؤں رانگا رانگا ہوئے جاتے ہیں۔
जिस ने कोड़ा दिया, क्या वो घोड़ा न देगा
जिस ख़ुदा ने थोड़ा दिया है वो बहुत भी देगा
रिग्गा लड़ाना
(पतंग बाज़ी) एक खेल जिसमें एक बच्चा अपने दोनों हाथों में धागा तान लेता है और दूसरा लड़का भी अपने हाथों में धागा तान लेता है फिर वह अपने तने हुए धागे से दूसरे लड़के के तने हुए धागे पर ज़ोर आज़माता है जिसका धागा टूट जाता है वह हार जाता है
खड़ा दौना दूँगी
(अविर) यानी मिन्नत मानती हूँ कि मुराद पूरी होने पर फ़ौरन नयाज़ दिलवाओं गी
कोठे ऊपर तोम्ड़ी, क्या देगी सोम्ड़ी
बख़ील का कंजूस से हाजतरवाई की उमीद नहीं होती
कोठे ऊपर तोम्ड़ी, क्या देगी लोम्ड़ी
बख़ील का कंजूस से हाजतरवाई की उमीद नहीं होती
ज़मीन में गाड़ दूँगा
(कठोर क्रोध की स्थिति में कहते हैं) ज़मीन में दफ़्न कर दूँगा, अंतिम कठोर दंड दूँगा
छाती पर कोई नहीं धर देगा
क़ब्र में धन-दौलत कोई साथ नहीं ले जाता, धन-दौलत साथ नहीं जाते यहीं रह जाते हैं
ऊँट दाग़े जाते थे मक्कड़ ने टाँग फैलाई कि मुझे भी दाग़ो
उच्च को देख कर निम्न भी उनकी रेस करने लगे
दागे के साँड तो दागे ले लोहार
जो काम हिस्स के लायक़ हो उसे ही करना चाहिए
चातुर नार नरकूढ़ से ब्याह होय पछताय, जैसे रोगी नीम को आँख मीच पी जाय
बुद्धिमान स्त्री मूर्ख से विवाह कर के पछताती है
चातुर नार नरकुढ़ से ब्याह होय पछताय, जैसे रोगी नीम को आँख मीच पी जाय
बुद्धिमान स्त्री मूर्ख से विवाह कर के पछताती है
पस्लियाँ तोड़ दूँगा
धमकी के तौर पर कहा जाता है, बहुत मारूँगा, ख़ूब पीटूँगा
ख़ैराँ ही ख़ैराँ देंगे , कोई ऐसे ही दाता देंगे
ख़ुमराओं के मांगने की सदा यानी ख़ुदा सलामत रखे, देंगे क्यों के ऐसे ही सखी दिया करते हैं
दिनों को दग़ा देना
To cheat one's fate, to live in a distress or misery.
सौ के रह गए सठ अधे गए नट, दस देंगे दस दिला देंगे दस का देना ही क्या
بالکل نادہند کی نِسبت کہتے ہیں نادہند مقروض کے متعلق کہا جاتا ہے کہ وہ طرح طرح کے بہانے بناتا ہے .
सौ के रहे सठ अधे गए नट, दस देंगे दस दिला देंगे दस का देना ही क्या
بالکل نادہند کی نِسبت کہتے ہیں نادہند مقروض کے متعلق کہا جاتا ہے کہ وہ طرح طرح کے بہانے بناتا ہے .
क़ाज़ी न्याव न करेगा तो घर तो आने देगा
अगर फ़ायदा ना हुआ तो कुछ नुक़्सान भी नहीं है
क़ा'इदगी
قاعدہ ہونا ، قاعدے کے مطابق ہونا (مرکبات میں بطور جزوِ دوم مستعمل).
शैख़ ने कछवे को भी दग़ा दी
शैख़ बहुत मक्कार होते हैं, एक शैख़ नदी पार होना चाहता था, कछुवे से वादा हुआ कि पार जाकर उसके लिए एक बकरा ज़बह करेगा, उसने पीठ पर चढ़ा कर पार उतार दिया, शैख़ जी ने सर से जूँ निकाल कर मार दी और चलते बने
क़ानून गोकी खोपड़ी मरी भी दग़ा दे
क़ानूनगो बड़े चालाक होते हैं
बे-क़ा'इदगी
असंबद्धता, बेतर्तीबी, नियम-विरोध, बेज़ाबितगी।
दो रंगी में फँसना
असमंजस में होना, परिवर्तनशील स्वभाव होना, पाखंडी होना, मुनाफ़िक़ होना, मक्कार होना
सब्र की दाद ख़ुदा देगा
सब्र करने वालों का ईश्वर ही न्याय करता है
सब्र की दाद ख़ुदा देगा
सब्र करने वालों का न्याय ईश्वर ही करता है
ख़ुदा को क्या जवाब दोगे
۔دیکھو اللہ کو۔ ؎
؎
یہ دونوں محاورے غائب و حاضر کے لئے مستعمل ہیں۔
चख डाल माल धन को कौड़ी न रख कफ़न को, जिस ने दिया है तन को देगा वही कफ़न को
आनंद लो ख़र्च करो, किसी बात की परवाह नहीं
जिस ने दिया तन को, वही देगा कफ़न को
ईश्वर ही पालने वाला है, आगे भी वही देगा, ईश्वर पर भरोसा करने के समय कहते हैं
हलवाई दीवाना होगा तो हिर फिर कर लड्डू अपनों ही को देगा
हर सूरत में अपनों को फ़ायदा पहुंचाने वाले के संबंध में कहते हैं
चख डाल माल धन को कौड़ी न रख कफ़न को, जिस ने दिया है तन को देगा वही मन को
आनंद लो ख़र्च करो, किसी बात की परवाह नहीं
वरक़ दाग़ी करना
पन्नों पर संख्याएँ लिखना, क्रमांक लिखना, संख्या लिखना
तुम ने दिल से निकाला , शहर तेरा हम छोड़ देंगे
تم نے دل سے نکالا شہر تیرا ہم چھوڑ دینگے
डोंडू ने कव्वे को भी दग़ा दी
डोंडू ने कछवे को भी दग़ा दी
चलत फिरत धन पाइए बैठे देगा कौन
मेहनत से फ़ायदा होता है घर बैठे खाने को नहीं मिलता