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दा
बीमारी, दुख, मुरक्कबात में जुज़ो-ए-अव़्वल के तौर पर मुस्तामल, मसलन दा-ए-अलासद, दा-ए-अलबोलेना वग़ैरा
गुज़श्ता रा सलवात आइंदा रा एहतियात
جو گزر گئی سو گزر گئی ، جو ہونا تھا ہو گیا ، آئندہ کے لیے احتیاط رکھیں (فارسی کہاوت اردو میں مستعمل).
गुज़श्ता रा सलवात आइंदा रा एहतियात
جو گزر گئی سو گزر گئی ، جو ہونا تھا ہو گیا ، آئندہ کے لیے احتیاط رکھیں (فارسی کہاوت اردو میں مستعمل).
आइंदा-रा याद
जो भूल हो चुकी है उस पर अधिक ध्यान देने के अतिरिक्त आने वाले समय के लिए सावधान रहना चाहिये ताकि उस भूल का आने वाले कल जैसा न हो (गुज़श्ता रा सलवात के साथ प्रयुक्त)
हर कमाले रा ज़वाले , हर ज़वाले रा कमाल
इंतिहाई तरक़्क़ी के बाद तनज़्ज़ुल और इंतिहाई तनज़्ज़ुल के बाद तरक़्क़ी शुरू होती है
आइंदा-रा एहतियात
जो भूल हो चुकी है उस पर अधिक ध्यान देने के अतिरिक्त आने वाले समय के लिए सावधान रहना चाहिये ताकि उस भूल का आने वाले कल जैसा न हो (गुज़श्ता रा सलवात के साथ प्रयुक्त)
हर कि ख़ूद रा बीनद ख़ुदा रा न बीनद
(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) मग़रूर आदमी ख़ुदा को नहीं पाता, ख़ुद पसंद शख़्स ख़ुदा शनास नहीं होता
'अक़्लमंदाँ रा इशारा काफ़ीस्त
(फ़ारसी कहावत उर्दू में प्रयुक्त) समझदार इशारे में बात समझ लेता है। उसे बहुत समझाना नहीं पड़ता, अक़्लमंदों के लिए इशारा काफ़ी होता है, अक़्लमंदों के लिए विवरण की आवश्यक्ता नहीं बल्कि वह इशारे में बात समझ जाते हैं
'अयाँ रा चे बयाँ
(फ़ारसी कहावत उर्दू में प्रयुक्त) जो बात मालूल है उसको बताने की ज़रूरत नहीं, जिसके लिए किसी तर्क की आवश्यकता न हो
हमा रा 'ऐब तू पोशी हमा रा 'ऐब तू दानी
(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) हर ऐब या बुराई का छिपाने वाला और हर ऐब या बुराई का जानने वाला तो (ख़ुदावंद ताला) ही है
ख़ुद कर्दा रा चे 'इलाज, ख़ुद कर्दा रा 'इलाजे नीस्त
अपने किए का क्या इलाज और क्या दवा-दारू, अपने किए का कोई 'इलाज नहीं इस लिए संतोष करना चाहिए
एल्ची रा चि ज़वाल
संदेश अच्छा है या बुरा इसके लिए संदेशवाहक ज़िम्मेदार नहीं है और विपरीत संदेश देना याद रखने पर संदेशवाहक को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया जाता
ख़ुद फ़ज़ीहत दीगराँ रा नसीहत
۔اس جگہ بولتے ہیں جہاں کوئی آٖ تو برا کام کرے اور دوسرے کو مانع ہو۔ ؎ فارسی میں خود را فضیحت الخ ہے۔ اردو میں صرف خود فضیحت بولتے ہیں باقی ٹکڑا چھوڑ دیتے ہیں۔
नज़्दीकाँ रा बेश्तर बूद हैरानी
(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो लोग क़रीब होते हैं, उन्हें परेशानी ज़्यादा होती है
आज़्मूदा रा आज़्मूदन जहल अस्त
परखे हुए को परखना अज्ञानता है, किसी को एक बार परख कर फिर परखना मूर्खता है
दीवाना रा होवे बस अस्त
فارسی کہاوت اردو میں مستعمل ، جسے کسی بات کی دُھن یا شوق ہو وہ ذرا سی شہ پر کر پھر ہمہ تن اسی میں لگ جاتا ہے اور من مانی کرنے لگتا ہے کسی بات کے شوقین کو ذرا سی شہ کافی ہے.
ख़ुद कर्दा रा चे 'इलाज
अपने किए का क्या इलाज और क्या दवा-दारू, अपने किए का कोई 'इलाज नहीं इस लिए संतोष करना चाहिए
लुक़मा रा हिकमत आमोख़्तन
(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) उलटा काम करना, मुतज़ाद सूरत इख़तियार करना, लुकमान को हिक्मत सिखाना, अक़लमंद को तदबीर बतलाना , लगू काम करना , बेवक़ूफ़ बनना
दरोग़ गो रा हाफ़िज़ा नमी बाशद
جھوٹے کا حافظہ درست نہیں ہوتا ، اسے یاد نہیں رہتا کہ پہلے کیا کہا ہے اور اب کیا کیا کہہ رہا ہے.
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