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गोड़ पड़ना
fall at someone's feet, touch someone's feet reverentially, prostrate oneself before a man of high position or caste, beg with great earnestness and humility
ज़मीन में गाड़ दूँगा
(कठोर क्रोध की स्थिति में कहते हैं) ज़मीन में दफ़्न कर दूँगा, अंतिम कठोर दंड दूँगा
गाय गाय का बच्चा, गाय खाए गुड़
बच्चों से एक खेल खेला जाता है जिस में कहने वाला गाल फुलाता है और मुंदरजा बाला अलफ़ाज़ कहता है इस तरह कि जब लफ़्ज़ गुड़ पर पहुंचता है तो दोनों हाथ फूले हुए गालों पर मारता है जिस की वजह से मन॒ा से बजाय गड़ के गुप निकलता है और बच्चे हंसते हैं
अहीर गाड़ी जात गाड़ी, नाई गाड़ी कुजात गाड़ी
जिस का काम उसी को साझे अगर नाई अहीर की नक़ल करे तो ठीक नहीं
गूड़ खाएँ गुलगुलों से परहेज़
जिस बात या जिस चीज़ को एक सूरत में नापसंद करें उसी को दूसरी सूरत में क़बूल करलीं, शोरबा हलाल बूटी हराम, बड़ी बात को करना और छोटी से परहेज़ करना, बड़ी बदनामी का ख़्याल ना करना छोटी से परहेज़ करना, अदना बुराई से बचना और बड़ी बुराई करना , बड़ों से मिलना और छोटों से दूर रहना
घर, घोड़ा, गाड़ी, इन तीनों के दाम खड़ा-खड़ी
इन तीनों का भुगतान तुरंत होना चाहिए, अथवा यह तीनों अपने स्थान पर ही बिकती हैं, अर्थात जहाँ वह देखी जा सकें
चलती का नाम गाड़ी, गाड़ी का नाम उखड़ी
दुनिया के उलटे ढंग पर कहावत है कि गड़ी हुई वस्तु को भी गाड़ी कहते हैं और चलती हुई को भी, ओखली उखड़ी हुई वस्तु को कहते हैं जबकि वो गड़ी होती है, यह उल्टी बात है कि जो चीज़ चलती है उसे गाड़ी कतहे हैं और जो गड़ी हुई होती है उसे उखड़ी हुई कहते हैं, गाड़ी उसी समय तक कहलाती है जब तक चले और जो चीज़ गड़ जाए उसे ओखली कहते हैं, अर्थात जब तक काम चले अच्छी बात है, रुक जाए तो अच्छा नहीं होता
गड़ खाऊं गुलगुलों से परहेज़
۔مثل (عو) اس جگہ بولتے ہیں جہاں کوئیح شخص کچھ کام کرے اور اسی طرح کے دوسرے کام سے پرہیز کرے۔خفیف سی بدنامی سے بچنا اور بڑی بدنامی سے احتراز نہ کرنا کی جگہ۔ تم ان کا کھانا کھانے سے انکار کرتے ہو لیکن انہیں کا دیا ہوا روپیہ جس سے کھانا منگانے کی فکر کررہی ہ
गुड़ खाऊँ, गुलगुलों से परहेज़
किसी शख़्स से दोस्ती का इज़हार करना और इस के बाप या बेटे से तंग आना, बड़ों से मिलना और छोटों से दूर रहना
जहाँ गुड़ होगा वहाँ मक्खियाँ आएँगी
रुपया वाले के मित्र अधिक हो जाते हैं, धनवानों के पास मंगते, ज्ञानियों के पास क्षात्र आदि आया करते हैं अर्थात जब किसी की कोई प्रिय वस्तु किसी के पास होगी तो वहाँ उस प्रकार के लोग भी उपस्थित होंगे
गुड़ चढ़ाओ तो पाप और तेल चढ़ाओ तो पाप
यानी हर हाल में बुराई है या जो शख़्स किसी काम से राज़ी ना हो, चोरी मामूली चीज़ की भी गुनाह है
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