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आख़िर तीन तेरह हो जाएँगे

अंत में असहमति हो जाएगी

दीवाली के दिए चाटकर जाएँगे

सत्यानास कर के छोड़ेंगे

दीवाली के देवे चाट कर जाएँगे

सत्यानास कर के छोड़ेंगे

जोड़ जोड़ मर जाएँगे और माल जमाई खाएँगे

कंजूस का माल यूँही जाता है, कंजूस के धन से अन्य लोगों को लाभ होता है

या तो खाएँगे घी से या जाएँगे जी से

ऐसे मौक़े पर प्रयुक्त जब कोई ज़िद करे कि या तो सर्वश्रेष्ठ चीज़ मिले या फिर कुछ भी नहीं चाहिए

शान में क्या जुफ़्ते पड़ जाएँगे

क्या शेखी या इज़्ज़त बिगड़ जाएगी

दीवाल रहेगी तो नेव बहुतेरे चढ़ जाएँगे

ज़िंदगी है तो सब कुछ है

नमाज़ नहीं रोज़ा नहीं सहरी भी न हो तो निरे काफ़िर बन जाएँगे

अगर बहुत सा असंभव हो तो थोड़ा सा सही, ऐसे अवसर पर उपयोगित जब किसी धार्मिक शिक्षा पर प्रक्रिया अपने पक्ष में हो

साईं साईं जीभ पर और किब्र कपट मन बीच, वह न डाले जाएँगे पकड़ नरक में खींच

जिन की जीभ पर ईश्वर का नाम है और उन के दिल में घमंड और धोका कपट और हसद है उन को अंत में नरक ही मिलेगा

जिस घर बडे न बूझें दीपक जले न साँझ, वो घर उजड़ जाएँगे जिन की त्रिया बाँझ

जिस घर में बड़ों की इज़्ज़त ना हो या शाम को दिए ना जलें या जिस घर में बांझ औरत हो वो घर उजड़ जाते हैं

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आख़िर तीन तेरह हो जाएँगे

अंत में असहमति हो जाएगी

दीवाली के दिए चाटकर जाएँगे

सत्यानास कर के छोड़ेंगे

दीवाली के देवे चाट कर जाएँगे

सत्यानास कर के छोड़ेंगे

जोड़ जोड़ मर जाएँगे और माल जमाई खाएँगे

कंजूस का माल यूँही जाता है, कंजूस के धन से अन्य लोगों को लाभ होता है

या तो खाएँगे घी से या जाएँगे जी से

ऐसे मौक़े पर प्रयुक्त जब कोई ज़िद करे कि या तो सर्वश्रेष्ठ चीज़ मिले या फिर कुछ भी नहीं चाहिए

शान में क्या जुफ़्ते पड़ जाएँगे

क्या शेखी या इज़्ज़त बिगड़ जाएगी

दीवाल रहेगी तो नेव बहुतेरे चढ़ जाएँगे

ज़िंदगी है तो सब कुछ है

नमाज़ नहीं रोज़ा नहीं सहरी भी न हो तो निरे काफ़िर बन जाएँगे

अगर बहुत सा असंभव हो तो थोड़ा सा सही, ऐसे अवसर पर उपयोगित जब किसी धार्मिक शिक्षा पर प्रक्रिया अपने पक्ष में हो

साईं साईं जीभ पर और किब्र कपट मन बीच, वह न डाले जाएँगे पकड़ नरक में खींच

जिन की जीभ पर ईश्वर का नाम है और उन के दिल में घमंड और धोका कपट और हसद है उन को अंत में नरक ही मिलेगा

जिस घर बडे न बूझें दीपक जले न साँझ, वो घर उजड़ जाएँगे जिन की त्रिया बाँझ

जिस घर में बड़ों की इज़्ज़त ना हो या शाम को दिए ना जलें या जिस घर में बांझ औरत हो वो घर उजड़ जाते हैं

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