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"khaak-e-saaqi-e-mahvash" शब्द से संबंधित परिणाम
साक़ी-ए-महवश
मधुशाला में मदिरा परोसने या पिलाने वाला जो चाँद से चेहरे का हो, प्रेमिका
ख़ाक-ए-सियाह
जलकर काली राख बना हुआ, भस्मसात्, भस्मीभूत
ख़ाक-ए-पाक
रोगमुक्त करनेवाली मिट्टी, किसी महात्मा या वली के द्वार की धूल, करबला या मदीना की मिट्टी जिसकी मालाएँ आदि बनती है
दिल-ए-ख़ाक
ज़मीन का बीच; क़ब्र; पैग़म्बर; नेक बंदे; प्रकार की मछली
ख़ाक-ए-पा
पैेरों की धूल, पांव की मिट्टी
'आलम-ए-ख़ाक
भूलोक, ज़मीन, मर्त्यलोक, दुनिया, संसार
'इल्म-ए-ख़ाक
وہ علم جو زمین کی سطح پر پڑی ہوئی مٹی کی موٹائی ، باریکی اور اس کے بننے والے عوامل کا مطالعہ کرتا ہے ، خاکیات ، (انگ : Pedology) .
ख़ाक-ए-मुर्दा
बंजर, ऊसर भूमि, ऐसी भूमि जिसमें कुछ उत्पन्न न हो
ख़ाक-ए-शिफ़ा
रोगमुक्त करने वाली मिट्टी, किसी महात्मा या वली के द्वार की धूल
तह-ए-ख़ाक
ज़मीन के नीचे, अर्थात् क़ब्र में
रिज़्क़-ए-ख़ाक
मिट्टी की ख़ुराक, मिट्टी का भोजन
फ़र्श-ए-ख़ाक
पृथ्वी का तल, ज़मीन की सतह, ज़मीनी फ़र्श, मिट्टी का फ़र्श, मिट्टी का बिस्तर
ख़ाक-ए-फ़रामोशाँ
समाधि-क्षेत्र, क़ब्रिस्तान
ज़ेर-ए-ख़ाक
मिट्टी के भीतर अर्थात्, क़ब्र में
कफ़-ए-ख़ाक
मुठ्ठी भर ख़ाक, ना-चीज़, मनुष्य
मुश्त-ए-ख़ाक
(शाब्दिक) मुट्ठी भर मिट्टी, मिट्टी की मुट्ठी, मिट्टी की चुटकी
रफ़्तगान-ए-ख़ाक
ज़मीन के अंदर गये हुए लोग, अर्थात् मुर्दे ।
ख़ुफ़्तगान-ए-ख़ाक
मिट्टी में सोने वाले, मुर्दे
आसूदगान-ए-ख़ाक
मुर्दे, क़ब्र में दफ़्न लोग
तोदा-ए-ख़ाक
मिट्टी का ढेर, मिट्टी का तोदा
मुहरा-ए-ख़ाक
भूमि, ज़मीन; इंसान का शरीर
कुर्रा-ए-ख़ाक
The terrestrial globe, the earth.
ख़ाक-ए-मुरक्कब
प्राणिवर्ग, वनस्पतिवर्ग और पाषाणवर्ग का समाहार।।
आसार-ए-'इश्क़-ए-ख़ाक
vestiges, remnants of the love for dust, sings of trifling love
आबरू-ए-'आलम-ए-ख़ाक
honour of the world of trifles
'इल्म-ए-ख़ाक-ए-सत्ह-ए-अर्ज़ी
ख़ाक-ए-दर-ए-बू-तुराब
हज़रत अली के दरवाज़े की धूल
पैवंद-ए-ख़ाक होना
(शाब्दिक) मिट्टी में मिलना, फ़ना होना, मर जाना, ज़मीन में गाडा या दबाया जाना, दफ़न होना, किसी मृत शरीर को कब्र में रखा जाना
सुपुर्द-ए-ख़ाक होना
'सुपुर्द-ए-ख़ाक करना' का अकर्मक, दफ़्न होना
तख़्त नशीनान-ए-ख़ाक
ख़ाक पर बैठने वाले, फ़ुक़रा
ख़ाक-ए-जिगर-गीर
ऐसा स्थान जहाँ से मन कहीं और जाने को न करे।
सुर्मा-ए-ख़ाक-बीं
एक सुरमा जो ख़ुसरौ परवेज़ ने बनवाया था, कहते हैं इसके लगाने से इंसान तीन फ़िट ज़मीन के अंदर देख सकता था
हुल्ला-गर-ए-ख़ाक
भूमि के वस्त्र बनाने वाला अर्थात् ईश्वर