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मुँह गढ़य्या में धो रखो
ये हसरत पूरी नहीं होगी, ऐसा नहीं होगा, क़ाबिलीयत और अहलीयत पैदा करो
मुँह गढ़य्या में धो डालो
ये हसरत पूरी नहीं होगी, ऐसा नहीं होगा, क़ाबिलीयत और अहलीयत पैदा करो
सज्दे में गिर पड़ना
फ़ौरन सजदे के ले ज़मीन पर सर दुख देना
कढ़ाई से निकल कर चुल्हे में गिर पड़ना
एक मुसीबत से निकल कर दूसरी बड़ी मुसीबत में फँस जाना
तन्नूर से बचने के लिये भाड़ में गिर पड़े
थोड़ी मुसीबत से बचने के लिए बड़ी मुसीबत में पड़ना
मी'आद-ग़ैर-मुंक़ज़िया
वह निश्चित अवधि जो अभी ख़त्म न हुई हो
अपना मारे छाँव में डाले ग़ैर मारे धूप में डाले
अपने फिर अपने होते हैं, दूसरों की अपेक्षा अपनों का आसरा लेना बेहतर है चाहे निर्दयी हों
अपना मारे छाँव में बिठाए ग़ैर मारे धूप में बिठाए
अपने फिर अपने होते हैं, दूसरों की अपेक्षा अपनों का आसरा लेना बेहतर है चाहे निर्दयी हों
मा'रका-ए-दार-ओ-गीर
anarchy, riots, looting, disorder
ज़मीन में गड़ जाना
ज़मीन में गाड़ना का अकर्मक, दफ़्न होना
ग़ैर-मा'क़ूल
نامعقول ، عقل کے خلاف ، وہ بات جس کو عقل قبول نہ کرے.
ज़मीन में गाड़ दूँगा
(कठोर क्रोध की स्थिति में कहते हैं) ज़मीन में दफ़्न कर दूँगा, अंतिम कठोर दंड दूँगा
दिल में बरछी गड़ जाना
मन पर गहरा प्रभाव पड़ना; कष्ट में फँस जाना
शर्म से ज़मीन में गड़ जाना
बहुत शर्मिंदा होना, बेहद पछतावा होना, शर्म से मुँह छिपाना
क़ब्र में गाड़ देना
दफ़न किया जाना, सपुर्द-ए-ख़ाक करना, मादूम हो जाना
ज़मीन में गाड़ देना
ज़मीन के अंदर दबाना, दफ़्न करना
'असबा-ए-म'अल-ग़ैर
(وراثت) وہ ورثا جو اپنے استحقاق اور دوسرے کے استحقاق کے ذریعے سے ورثہ پاتے ہیں ، جو عصبہ عصبہ بغیرہ یا عصبہ بنفسہ نہ ہو ، جو عورت دوسری عورت سے مل کر عصبہ ہوجائے.
ग़ैर-मे'यारी
जो आदर्श के अनुसार न हो, जो विद्वत्तापूर्ण न हो, जो दर्जे से गिरा हुआ हो
ग़ैर-मा'रूफ़
जो प्रसिद्ध न हो, जो मशहूर नह हो, जो साधारण न हो, जिस की ख्याति न हो, गुमनाम
ग़ैर-मा'मूलिय्यत
معمول کے خلاف ہونا ، دستور کے برعکس ہونا.
ग़ैर की आग में जलना
दूसरे की विपत्ति में पड़ना, दूसरे व्यक्ति के प्रेम में जलना
ग़ैर-मा'सूम
जो पाप रहित न हो, पापयुक्त
ग़ैर-मा'मूल
معمول کے خلاف ، خلافِ دستور ، معمولاً جو حد مقرر ہو اس سے بڑھا ہوا.
ग़ैर-मा'मूली
जो ख़ास हो, जो साधारण न हो, असाधारण, विशिष्ट
ग़ैर मा'मूली तौर पर
unusually, extraordinarily
मा'रका-गीर
बाज़ीगर, रस्सी पर चढ़ कर नाचने वाला शख़्स
गुर तो ऐसा चाहिए जों सैक़ल-गर होए जनम जनम का मोरचा छिन में डाले धोए
गुरु सकली गिर की तरह होना चाहिए जो सालहा साल के ज़ंगार को पल में साफ़ कर दे, गुरु बहुत काबिल शख़्स होना चाहिए
हाज़िर में हुज्जत नहीं ग़ैर की तलाश नहीं
जो मौजूद है इस के देने में इनकार नहीं, नज़र है, जो चीज़ मौजूद नहीं उसे ला कर देने का इक़रार नहीं
हाज़िर में हुज्जत नहीं ग़ैर हाज़िर की तलाश नहीं
जो मौजूद हैं उनको मिल जाता है, जो मौजूद नहीं उनकी पर्वा नहीं की जाती, बेलाग आदमी के मुताल्लिक़ कहते हैं
गाँड़ में पतंगे लगना
(अश्लीलता, बाज़ारी) अत्यंत अप्रिय होना, बहुत बुरा लगना, मिर्च जैसा लगना
गाँड़ में उँगली करना
(फ़ुहश , बाज़ारी) दिक़ करना, सताना
गाँड़ में थूकना
(अश्लीलता; बाज़ारी) अत्यंत अपमानित करना, शर्र्मिंदा करना
गाँड़ में घुसना
रुक : गाँड़ में घिसा जाना, रहना
गाँड़ में मिर्चें लगना
(अश्लील; बाज़ारी) बहुत अखरना, अत्यधिक बुरा लगना; चिढ़ना; बहुत नाराज़ होना, झल्लाना, क्रोधित होना
गाँड़ में थूक लगाना
(अश्लील; बाज़ारी) अपमानित करना, शर्मिंदा करना; धोखा देना
गाँड़ में घुस जाना
(अश्लील, बाज़ारी) जाता रहना, दूर होना, निकल जाना, ख़त्म होना
गाँड़ में घुसा जाना
(फ़ुहश , बाज़ारी) निहायत ख़ुशामद करना, लल्लू पतो करना
गाँड़ में चुनचुने लगना
۲. चुल मिटवाने को जी चाहना
गाँड़ में घुसा रहना
(फ़ुहश , बाज़ारी) हर-दम साथ रहना, ख़ुशामद के मारे हरवक़त किसी के पास रहना, ख़ुशामद के लिए साथ साथ लगे फिरना
गाँड़ में गूह भी नहीं
(फ़हश , बाज़ारी) कोड़ी पास नहीं, निहायत मुफ़लिस है
गाँड़ में गूह नहीं और कव्वे मेहमान
मुफ़लसी में फुज़ूलखर्ची, अपनी हैसियत से बढ़ कर ख़र्च करना
पराई गाँड़ में लकड़ी गई भुस में गई
पराया दर्द मालूम नहीं होता
गाँड़ में लँगोटी तक न होना
(फ़ुहश , बाज़ारी) निहायत ग़रीब होना, बिलकुल मुफ़लिस-ओ-क़लाच होना
गाँड़ में लँगोटी तक न रहना
कव्वे की गाँड़ में अनार की कली
असंगत बेजोड़ चीज़, बेतुकी बात
कव्वे की गाँड़ में अनार की कली
असंगत बेजोड़ चीज़, बेतुकी बात
गुर तो ऐसा चाहिए जों सक़्ली-गर होए जनम जनम का मोरचा छिन में डाले धोए
गुरु सकली गिर की तरह होना चाहिए जो सालहा साल के ज़ंगार को पल में साफ़ कर दे, गुरु बहुत काबिल शख़्स होना चाहिए
गँड़ में गूह नहीं और कव्वों की मेहमानी
मुफ़लसी में फुज़ूलखर्ची, अपनी हैसियत से बढ़ कर ख़र्च करना
गुर तो ऐसा चाहिए जों सक़्ली-गर होए जनम जनम का मोरचा छिन में डाले खोए
गुरु सकली गिर की तरह होना चाहिए जो सालहा साल के ज़ंगार को पल में साफ़ कर दे, गुरु बहुत काबिल शख़्स होना चाहिए
गांड़ में लंगोटी, न सर पे टोपी
अत्यन्त ग़रीब है, कुछ पहनने तक को प्रयाप्त नहीं है
ग़ल्ला गर अर्ज़ां शवद इम्साल सय्यद मी शवम
(फ़ारसी कहावत उर्दू में मसतक़ामल) उस शख़्स की नसबक़त बोलते हैं जो मौक़ा बे मौक़ा बदलता रहे
गर न सितानी ब सितम मी रसद
(फ़ारसी कहावत अदबीयात में मुस्तामल) जब बगै़र ख़ाहिश के चीज़ मिल जाये तो ऐसे मौक़ा पर कहते हैं