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पिंजरा
धातु, बाँस आदि की तीलियों का बना हुआ बक्स की तरह का वह आधान जिसमें पक्षी, पशु आदि बंद करके रखे जाते हैं, प्रतीकात्मक: इंसानी शरीर का ढाँचा, ऐसा स्थान जहाँ से किसी का बाहर निकलना प्राय, असंभव या दुष्कर हो
पिंजरा
पक्षी पालने के लिए तीलियों से बनाया जाने वाला घर, दरबा
पाँजरा
वह मल्लाह जो मल्लाही में अनाड़ी हो, डंडा, कोली
पंजड़ी
चौसर अर्थात पचीसी का एक दाँव, (चौसर) जब दो पाँसे दो दो संख्या के और एक पाँसा एक का पड़े, (पच्चीसी) जब पाँच कौड़ियाँ चित पढ़ें
पिंजरे की खड़ी खोल देना
۔ (مجازاً) آزادی دینا۔ آزاد کرنا۔؎
पिंजरे की खिड़की खोल देना
पाँज़दह
पंद्रह की संख्या, पंद्रह वस्तुएँ, पंद्रह, दस और पाँच
पंजेरा
बरतन झालने का काम करनेवाला, बरतन में टाँके आदि देकर जोड़ लगानेवाला
पंजीरी
(हिंदू) पंजीरी प्रसूता स्त्री कि लिये भी बनती है ओर पठावे में भी भेजी जाती है, जिसे घी में भुनी हुई सूजी, चीनी, पिसी हुई सोंठ, छुहारे, भुनी हुई गोंद और मखाने आदि मिला कर तैय्यार की जाती है, इस से दूध बढ़ता है
पिंजारी
त्रायमाणा नाम की लता जो औषधि आदि में उपयोग होती है
पंजूरी
(गाड़ी बानी) छकड़े या ठेले की फेड़ के दोनों तरफ़ बराबर बराबर जुड़ी हुई आवश्यकतानुसार लम्बी लकड़ियों (या लोहे) की बाड़ जो सामान की रोक की बग़ली आड़ का काम देती है, पा जोड़ी
पिंजरा-पोल
وہ جگہ جہاں پالنے کے لئے گائے بیل وغیرہ چوپائے رکھے جاتے ہیں ، گؤشالہ۔
पंज-दस्ती
(لفظاً) پان٘چ ہاتھ والی ، (مجازاً) پان٘چ لڑیوں والی ؛ زیادہ ، بکثرت.
पंज-दरा
पाँच-कक्षीय (दालान, आदि), पच दरा
पंज-दस्त
(لفظاً) پان٘چ ہاتھ والا ، (مجازاً) بہادر ، دلیر ، شجاع.
पाँज़दहुम
पंद्रहवाँ, चौदह के बादवाला
पंजा-ए-दु'आ
ہاتھ جو دعا کے لیے پھیلایا جائے.
मियाँ मिट्ठू पढ़ो तो पढ़ो नहीं पिंजरा ख़ाली करो
काम करना है तो करो नहीं तो जाओ
बोलो तो बोलो, नहीं पिंजरा ख़ाली करो
तोते को कहा जाता है कि यदि बातें न करोगे तो निकाल देंगे
बोलो तो बोलो, नहीं पिंजड़ा ख़ाली करो
तोते को कहा जाता है कि यदि बातें न करोगे तो निकाल देंगे
बग़ल में तोती का पिंजरा, नबी जी भेजो
अत्यधिक लालची, हर समय दूसरों के माल-ओ-दौलत पर नज़र
पढ़ो तो पढ़ो नहीं पिंजरा ख़ाली करो
काम करना है तो करो नहीं तो जाओ
गोंदपंजीरी
गोंद मिली हुई पंजीरी जो प्रसूता स्त्रियों को खिलाई जाती है
सोंठ-पंजीरी
a caudle of dry ginger (given to puerperal women)
कया मुँह में पंजीरी भरी है
बोलते क्यों नहीं, क्यों चुप हो
क्या मुँह में पंजीरी भरी है
बोलते क्यूँ नहीं, चुप क्यूँ हो