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वहाँ
(इस के) यहां, (इस के)हाँ, (इस के) घर पर या शहर वग़ैरा में, उस अवसर, बिंदु या स्थिति या स्थान पर
वहीं
(ह। बफ्ता अव्वल) उसी जगह। इसी मुक़ाम पर।मख़सूस जगह के लिए
अव्वाह
आह आह करने वाला, ख़ुदा के सामने बहुत रोने धोने वाला, ईश्वर से बहुत लगाव रखने वाला
वहाँ के
اُس جگہ کے ، اُس ملک یا مقام کے ۔
वहाँ का
of or belonging to that place, made or produced there
वहाँ की
उस जगह की, उस स्थान की; किसी शहर आदि की बनी हुई
यूँ भी वाह वाह, वूँ भी वाह वाह
दोनों तरह से अच्छा है, हर तरह से ख़ुशी की जगह, दोनों तरह सफलता, इस तरह भी अच्छा उस तरह भी अच्छा
रहे तो वाह वाह, न रहे तो वाह वाह
जब किसी के जाने या किसी के रहने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, तो बोलते हैं
वाह वाह वाह करना
प्रशंसा करना, सराहना, दाद देना
वाह वाह वाले
दाद देने वाले प्रशंसक, श्रोतागण, तमाशाई, सामईन
वाह साहिब वाह
तान की जगह और गाहे तारीफ़ में मुस्तामल, वाह भई, वाह जी
वाह भई वाह
बहुत बढ़िया, क्या कहना (आश्चर्य या अफ़सोस प्रकट करने के लिए उपयोगित)
मियाँ की दाढ़ी वाह वाह में गई
झूठी प्रशंसा के लोभ में जब कोई अपनी सब संपत्ति उड़ा दे तब कहते हैं
वाह वाह गिरगिट का बच्चा ताना शाह
अदना शख़्स और ये आली दिमाग़ी, कमीने को देखो कैसा आली दिमाग़ बना है , अदना का कंगाल हो कर आली दिमाग़ बनना
जहाँ गंगा वहाँ झाव , जहाँ बामन वहाँ नाव
बड़ों से छोटों को फ़ैज़ पहुंचता है
ऐ वाह वाह
(تعریف کرنے یا داد دینے کے موقع پر) کیا خوب ، واہ واہ ، سبحان اللہ
वाह वाह लेना
प्रशंसा प्राप्त करना, बधाई प्राप्त करना, वाह-वाही लूटना
अपने औड़ बटाए वा की वह जाने
अपने काम से काम दूसरों से किया मतलब
वाह वाह होना
तारीफ़ एवं प्रशंसा होना, बड़ाई होना, प्रसिद्धि होना, धूम होना, नामवरी होना, डंका बजना, चर्चा होना
वाह वाह कहना
प्रशंसा करना, तारीफ़ करना, वाह वाह करना
वाह रे मैं , वाह रे हम
۔اپنے کسی فعل پر فخر وناز کرنے کے لئے مستعمل ۔؎
वाह वाह घिरघिट का बच्चा ताना शाह
अदना शख़्स और ये आली दिमाग़ी, कमीने को देखो कैसा आली दिमाग़ बना है , अदना का कंगाल हो कर आली दिमाग़ बनना
यूँ भी वाह वा और वूँ भी वाह वा
दोनों तरह से अच्छा है, हर तरह से ख़ुशी की जगह, दोनों तरह सफलता, इस तरह भी अच्छा उस तरह भी अच्छा
वहाँ का वहाँ
at that very place or spot
वाह वाह हो जाना
तारीफ़-ओ-तौसीफ़ होना, शौहरत होना, नामवरी होना, चर्चा होना
जहाँ गाय वहाँ गाय का बछ्ड़ा
जहां मालिक वहीं इस के साथी, जहां फ़ायदे की चीज़ हो वहां सब जमा होते हैं
जहाँ सत्तयानास , वहाँ साढे़ सत्तयानास
۔مثل۔ جب بربادی ہوئی کم وبیش کی کیا پروا۔
वाह
बहने वाला। (यौ० के अन्त में) पुं०१. वाहन। सवारी। जैसे-गाड़ी, रथ आदि। २. बोझ खींचने या ढोनेवाला पशु। जैसे-घोड़ा, बैल आदि।
आप भी बड़े वह हैं
बहुत बदमाश हो, बड़े शरीर हो
जहाँ पड़े मूसल वहाँ खेम कूशल
जहाँ भंग घटे वहाँ स्वास्थ्य है
मियाँ की दाढ़ी वाह वाही में गई
झूठी प्रशंसा के लोभ में जब कोई अपनी सब संपत्ति उड़ा दे तब कहते हैं
सूई जहाँ न जावे वहाँ सुवा घुसेड़ना
ज़्यादती या ज़बरदस्ती करना, बे-जा दबाओ डालना, हैसियत से ज़्यादा ज़ेर करना
वहीं के वहीं
at the same place, exactly the same as before
वहीं का वहीं
at the same place, exactly the same as before
कोई यहाँ कोई वहाँ
here and there, scattered
जहाँ सेर वहाँ सवाई
अपव्ययी अर्थात आवश्यक्ता से अधिक ख़र्च करने वाला व्यक्ति कम या अधिक की परवाह नहीं करता, जहाँ बहुत सी हानि हुई थाड़ी और सही
जहाँ चाह वहाँ राह
जिसके लिए दिल में जगह हो उसके साथ गुज़ारा भी हो जाता है
जहाँ बजे ढोल वहाँ खड़े बहलोल
उस व्यक्ति के बारे में कहा जाता है जो बिना बुलाए या आमंत्रित किए हर जगह जाता है
जहाँ सूई न जाए वहाँ मोसल घुसेड़ना
रुक : जहां सोई ना जाये वहां लट्ठा करना
यह वह गुड़ नहीं जो मक्खियाँ खाएँ
हर एक को यह बात हासिल नहीं हो सकती
जहाँ दाई हाथ धोए वहाँ क़ुर्बान करूँ
ज़लील करने के मौक़ा पर औरतें कहती हैं
जहाँ सौ वहाँ सवाए
बेकार में रुपया ख़र्च करने वाला व्यक्ति कम और अधिक नहीं देखता, जहाँ बहुत हानि हुआ, थोड़ा और सही
जहाँ सौ वहाँ सवाए
बेकार में रुपया ख़र्च करने वाला व्यक्ति कम और अधिक नहीं देखता, जहाँ बहुत हानि हुआ, थोड़ा और सही
जहाँ जाए भूखा, वहाँ पड़े सूखा
दुखिया को सब जगह दुख ही दुख लगा रहता है, अभागे का भाग्य हर जगह साथ रहता है
यह वह गुड़ नहीं जो मक्खी बैठे
हर एक को यह बात हासिल नहीं हो सकती
वाही-तबाही पड़ा फिरना
मारा मारा फिरना, दर-दर की ठोकर खाना, आवारा फिरना, हैरान एवं परेशान फिरना
जहाँ दाई हाथ धोए वहाँ क़ुर्बां करूँ
۔(عو) ذلیل کرنے کو کہتے ہیں۔ تجھ گرانے والی کو جہاں جہاں اس کی دائی نے ہاتھ دھوئے قرباں کروں۔
जहाँ का मुर्दा वहीं गड़ता है
जहाँ का झगड़ा होता है वहीं ख़त्म होता है, जहाँ झगड़ा हो वहाँ की रस्म और रिवाज की मुताबिक़ फ़ैसला होता है
यह वह गुड़ नहीं जिसे मक्खियाँ खाएँ
हर एक को यह बात हासिल नहीं हो सकती
वाह मुँह तो देखो
बिना किसी औपचारिकता के दोस्त से संबोधन
सूई जहाँ न जाए वहाँ सुवा घुसेड़ते हैं
जहाँ थोड़ी चीज़ की संभावना नहीं वहाँ अधिक डालते हैं
जहाँ गुड़ होगा वहाँ मक्खियाँ आएँगी
रुपया वाले के मित्र अधिक हो जाते हैं, धनवानों के पास मंगते, ज्ञानियों के पास क्षात्र आदि आया करते हैं अर्थात जब किसी की कोई प्रिय वस्तु किसी के पास होगी तो वहाँ उस प्रकार के लोग भी उपस्थित होंगे
सूई जहाँ न जाए वहाँ भाला घुसेड़ते हैं
जहाँ थोड़ी चीज़ की संभावना नहीं वहाँ अधिक डालते हैं