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दाँव दो दाँव , तीसरा दाँव ख़ुदाई दाँव
दो एक बार ना काम होने के बाद तीसरी तार आदमी ज़रूर कामीबी के साथ को काम अंजाम देगा (बेशतर खेल में खिलाड़ियों का रोज़मर्रा
कोठे वाला रोवे, छप्पर वाला सोवे
दुनिया में धनी अधिक इच्छुक चिंतित और शिकायतकर्ता के रूप में पाए जाते हैं और निर्धन निश्चिंत एवं प्रसन्न
रोटी को रोवे, खपड़ी को टोहवे
रोटी का मारा उसी की जुस्तजू में रहता है, निहायत ग़रीब है खाने तक को नहीं मिलता
देव-पछाड़
(کُشی) ایک داؤ جس کی صورت پہ ہوتی ہے کہ اپنے داہنے ہاتھ سے حریف کا بایاں پونہچا پکڑ کر اپنے بائیں ہاتھ کو حریف کی آنکھوں کی طرف بڑھاتے ہیں تاکہ حریف اپنی گردن کو اُونچی کرے پھر فوراً آگے پڑھ کر اس کے داہنے پیر کا موزہ نیچے کی طرف سے پکڑ کر اس کے ہاتھ اور ٹانگ کو دو قدم کھینچتے ہیں حریف گر کر چت ہو جاتا ہے
दह-रवाँ , दह-दवाँ , दह-परान
माह रमज़ान के दिन जल्द जलद गुज़र जाने का ज़िक्र इन अलफ़ाज़ में किया जाता है, यानी इबतिदाई दस दिन नसबन रवां (मामूली चाल) के होते हैं, दूसरे दस दिन दवां (यानी दौड़ते हुए) और तीसरा अशरा प्राण (उड़ते हुए) यानी बड़ी तेज़ी से गुज़र जिऐता है
मोज़े का घाव बीवी जाने या राव
ख़ानगी मुआमलात से आदमी ख़ुद ही ख़ूब वाक़िफ़ होता है, अपनी तकलीफ़ को इंसान आप ही अच्छी तरह समझ सकता है , राज़ राज़दार ही को मालूम होता है
आतिश-बाज़ी का देव
बारूद इत्यादि से भरे हुए बाँस और काग़ज़ से बनाया हुआ डरावना रूप जिसे आतिशबाज़ी के लिए छुड़ाते हैं
रवी-ए-मुज़ा'अफ़
اگر حرف روی اور حرف مدہ کے درمیان کوئی حرفِ ساکن ہو تو اُسے روی مُضاعف کہتے ہیں جیسے چان٘د اور مان٘د کا نوں اسی کو ردفِ زائد بھی کہتے ہیں
बारह गाँव का चौधरी अस्सी गाँव का राव, अपने काम न आवे तो ऐसी तैसी में जाव
आदमी चाहे कितना ही धनवान हो परंतु यदि किसी के काम न आए तो किसी कीम का नहीं
राजा कहे सो न्याव पासा पड़े तो दाव
हाकिम जो फ़ैसला करे इंसाफ़ कहलाता है अगर बाज़ी जीते तो दाओ कहलाता है
राजा करे सो न्याव पासा पड़े तो दाव
हाकिम जो फ़ैसला करे इंसाफ़ कहलाता है अगर बाज़ी जीते तो दाओ कहलाता है
गाँव बसते भूतना शहर बसते देव
गांव में भुतने बस्ते हैं और शहर में देव, देहातियों की शरारतों और झगड़ों पर तंज़ है गन॒वार लड़ते झगड़ते रहते हैं मगर शहर वाले तहम्मुल से रहते हैं
राँड रोवे कँवारी रोवे, साथ लगी सत-ख़स्मी रोवे
रांड रोती है कि उसका पति मर गया कुंवारी रोती है कि उसका बाप मर गया सत-ख़समी क्यूँ रोती है
ज़ोर बादशाह दाँव वज़ीर है
पहलवानों की मिसल है, ताक़त की तारीफ़ है ताक़त तदबीर से अफ़ज़ल दर्जा रखती है बादशाह जस्सी ताक़त और वज़ीर जैसी चालाकी होशयारी
मोज़े का घाव रानी जाने या राव
ख़ानगी मुआमलात से आदमी ख़ुद ही ख़ूब वाक़िफ़ होता है, अपनी तकलीफ़ को इंसान आप ही अच्छी तरह समझ सकता है , राज़ राज़दार ही को मालूम होता है
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