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'अम्वी
मेरे चचा, मेरे बाप के भाई
अम्वा
आम की रंगत की तरह रंग, गहरा रंग
मेवे
खाने का फल, किशमिश, बादाम, अख़रोट आदि सुखाए हुए बढ़िया फल
movie
बोल चाल: अमरीका मुतहर्रिक फ़िल्मी तस्वीर।
मावा
उक्त जली हुई ईंट का टुकड़ा जिसमें प्रायः छोटे-छोटे छेद होते हैं तथा जिसका प्रयोग चीजों पर से दाग छुड़ाने और विशेषतः पांवों पर जमी हुई मैल रगड़कर छुड़ाने के लिए होता है।
मुवा
एक पेड़ का नाम जिसके फलों को खाते, बीजों का तेल निकालते और फूलों की शराब बनाते हैं, महुवा
मीवा
ایک کیڑا جو آنتوں میں پیدا ہوجانا ہے ، کدو دانہ ، کیچوا
मावी
ماء (رک) سے منسوب یا متعلق ، آبی.
मेवा
आज-कल विशिष्ट रूप से किशमिश, बादाम, अखरोट आदि सुखाए हुए बढ़िया फल।
मव्वा
एक पेड़ का नाम जिसके फलों को खाते, बीजों का तेल निकालते और फूलों की शराब बनाते हैं, महुवा
मि'अवी
(طب) امعائی ، انتڑیوں کا ، آنتوں سے متعلق
अम्वात-ए-अहमर
बध होनेवाले, शहीद होनेवाले।।
अम्वात
मौतें, मृत्युएँ, हताहतें, जनहानियाँ
अमवाल
‘माल' का बहुवचन, सम्पत्तियाँ, धन-समूह, माल-ओ-दौलत
मुवा साँप गले में पड़ा है
बड़ा दिक़ होना, कुछ तदबीर नहीं चलना, बरी-उल-ज़मा नहीं हो सकना
मुवा घोड़ा भी कहीं घास खाता है
मृत्यु के पश्चात जो रस्में होती हैं उन पर व्यंग है
मुवा जाना
साँस निकल जाना, घबरा जाना
मावा निकालना
माँड़ निकालना, (बाज़ारी) मार-मार कर कचूमर निकालना, भुरकस करना, ख़ूब पीटना
मेवा पलना
फल पक जाना, मेवा पकना, मेवा खाने के लायक़ हो जाना
मेवा पुल जाना
मेवे का गर्मी पा कर मुलायम हो जाना, स्वादहीन होना, स्वाद खराब हो जाना
मुवा जाता है
۔ फ़रेफ़्ता हुआ जाता है, मर मिटा है
कब मुवा कब कीड़े पड़े
बहुत लंबा काम है जल्द नहीं हो सकता
'औरत न मर्द, मुवा हीजड़ा है, हड्डी न पस्ली, मुवा छीछड़ा है
महिलाएं डरपोक निर्बल के संबंधित कहती हैं कि डरपोक आदमी किसी काम का नहीं होता
'औरत न मर्द, मुवा हिजड़ा है, हड्डी न पस्ली, मुवा छीछड़ा है
महिलाएं डरपोक निर्बल के संबंधित कहती हैं कि डरपोक आदमी किसी काम का नहीं होता
'औरत न मर्द, मुवा हिजड़ा है, हड्डी न पस्ली, मुवा छिछड़ा है
महिलाएं डरपोक निर्बल के संबंधित कहती हैं कि डरपोक आदमी किसी काम का नहीं होता
'औरत न मर्द, मुवा हीजड़ा है, हड्डी न पस्ली, मुवा छीचड़ा है
महिलाएं डरपोक निर्बल के संबंधित कहती हैं कि डरपोक आदमी किसी काम का नहीं होता
अंडे सेवे फ़ाख़्ता , कव्वे मेवे खाएँ
मशक़्क़त करे कोई और मज़े उड़ाए कोई
टिढ़-मुवा
رک : ٹڑھ من٘ہا ؛ ٹیرھے من٘ھ والا، جس کا من٘ھ ٹیڑھا ہو.
नहद शाख़ पुर मेवा सर बर ज़मीं
(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) फलों से लदी हुई टहनी ज़मीन पर सर रख देती है , अल्लाह ताला जिस को दौलत-ओ-इज़्ज़त दे उस को फ़िरोतनी इख़तियार करनी चाहिए
जो बिन सहारे खेले जुवा, आज न मुवा कल मुवा
अनाड़ी आदमी जुए में तबाह और बर्बाद हो जाता है
होते ही न मुवा जो कफ़न थोड़ा लगता
रुक : होते ही क्यों ना मर गया , ऐसे शख़्स की निसबत बोलते हैं जिस से सख़्त नफ़रत हो, ऐसा शख़्स पैदा ही ना होता तो बेहतर था कि ज़्यादा कफ़न भी ना देना पड़ता या बुरा आदमी अगर पैदा होते ही मर जाये तो अच्छा है
जो करे सेवा वही खाए मेवा
जो सेवा करता है वही लाभ उठाता है
लक्ष्मी देवी का मेवा
उत्तर भारत में नारियल की गणना बहुत पवित्र फलों में होती है और वह श्रीफल अथवा लक्ष्मी देवी का मेवा कहलाता है, नारियल श्री फल
snuff movie
अवाम: का बलाअतराज़ फ़िल्म जिस में क़तल की हक़ीक़ी वारदात दिखाई जाये।
ढाक तले की फुवड़ मव्वे तले की सुघड़
बा सामान हर तरह से बासलीक़ा और बे सामान बदसलीक़ा कहलाता है (मो्वा (महो) फुलदार दरख़्त है और ढाक है फल का) अमीर के सब काम अच्छ्াे मालूम होते हैं
बेगाने भरोसे पे खेला जुवा आज न मुवा कल मुवा
जो ग़ैर के भरोसे पर कोई काम करता है वो बहुत जल्द तबाह होजाता है
छुवा और मुवा
शरारती आदमी के मुताल्लिक़ कहते हैं कि जिस की तरफ़ तवज्जोह की उसको तबाह कर दिया
सेवा करे सो मेवा पावे
one who serves shall reap
जो सेवा करे सो मेवा पावे
जो सेवा करता है वो लाभ उठाता है
काबुल में मेवा भई, बृज में भई करील
जहाँ जो वस्तु होनी चाहिए उसका वहाँ न होना
सेवा करे सो मेवा पाए
one who serves shall reap
जो सेवा करे सो मेवा पाए
जो सेवा करता है वो लाभ उठाता है
रोता जावे मुवे की ख़बर लावे
बदशगुनी का परिणाम बुरा होता है, बदक़िस्मत का जो काम है वह मनहूस ही होता है, हर एक चीज़ के आसार से अंजाम मालूम हो जाता है
बिन लाग जो खेले जुवा, आज न मुवा कल मुवा
अनाड़ी आदमी जुए में तबाह और बर्बाद हो जाता है
जैसी सेवा करे तैसा मेवा खाए
ख़िदमत से अज़मत है,ख़िदमत-ओ-मेहनत के मुताबिक़ माज़ा मिलता है
खाने को मव्वा , पहनने को अमव्वा
मुफ़लसी में ज़ाहिरी नमूद रखना, खाना नसीब नहीं है मगर उम्दा लिबास है
खोदे कुवा आपी डुब मुवा
अपनी हलाकत या तबाही के ख़ुद अस्बाब पैदा करना, ऐसे शख़्स के लिए बोलते हैं जो दूसरों की तकलीफ़ का सामान करता है मगर ख़ुद ही इस का शिकार हो जाता है