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'अली की तेग़ की मार हो

(कोसना) रुक : अली की तेग़ पड़े

'अली की मार

(कोसना) हज़रत अलेऊ का अज़ब हो , हज़रत अलेऊ की फटकार हो

'अली की सँवार

(कोसना) तबाह-ओ-बर्बाद हो, हज़रत अलेऊ इस का क़िला क़ुमा करदें

'अली की तेग़ का फल टूटे

(कृसना) रुक : अली की तेग़ पड़े

फूलों की मार

'अली की कमान

तीसों कलाम की मार होना

अज़ाब नाज़िल होना, गुनाह होना

मार पेच की बातें

फ़रेब की बातें, धोखे की बातें

मार खाने की बातें

सज़ा के क़ाबिल बातें, दंड के योग्य

लूट कोइलों की , मार बरछी की

नुक़्सान बहुत फ़ायदा कम

'अक़्ल की मार

हँसी की फँसी हो जाना

रुक : हंसी में फंसी हो जाना

आँखें पत्थर की हो गईं

मुसलसल एक ही तरफ़ देखते देखते आंखों के आगे अंधेरा छा गया, आंखें बेनूर होगईं, बेहिस-ओ-हरकत होगईं, जैसे पत्थर की हैं

सोने की मार

कमबख़्ती की मार

बदनसीबी का बुरा हो, बेज़ारी के इज़हार के मौक़ा पर कहते हैं

बे-मार की तौबा

बिना कारण के हाए वाए, मौत से पहले शोक और विलाप

ख़ुदा की मार

(कोसना) अल्लाह का ग़ज़ब, अल्लाह ताला की लानत (लानत, फटकार भेजने के मौक़ा पर मुस्तामल)

शामत की मार

रोज़ी की मार

रोज़ी की तकलीफ़, बेरोज़गारी का दुख

ज़रूरत की मार

ग़रीबी या अभाव का कष्ट, मजबूरी, किसी चीज़ की तलब

क़ुरआन की मार

(दाये बद) क़ुरआन की फटकार

हाथ की मार से बात की मार बदतर है

तंज़िया दिल आज़ारी के जुमले से जिस्मानी चोट से ज़्यादा तकलीफ़ होती है

'अली की तैग़ पड़े

(कोसना) हज़रत अली का प्रकोप प्रकट हो, हज़रत अली का ग़ज़ब नाज़िल हो, मुख़ालिफ़ या विरोधी तबाह-ओ-बर्बाद हो

इस की नहीं हो रही

कमज़ोर मार खाने की निशानी

ख़रगोश की तरह झाड़ियों में मार लेना

निहायत ही आसानी से हासिल कर लेना, आसानी से क़ाबू कर लेना

सोने की मार देना

रुपया देकर वश में करना

मार खाने की निशानी

मार खाने की बात

कूएँ की तह में तारा हो जाना

गहरे कोनें की ता में पानी का चमकना

होंटों की होंटों में

मुँह पर आई बात कह ना सकना, अपनी बात पूरी ना कर सकना

घमसान की मार होना

ज़बरदस्त जंग होना, आरपार की लड़ाई होना

औसर की दौसर हो जाना

साँप की तरह फन मार कर रह जाना

सांप अपने मन के लिए फन मारता है और फिर हासिल नहीं करसकता) कोशिश करके ना उम्मीद रह जाना, क़ाबू ना पाना

ख़ुदा की मार होना

हड्डियों की माला हो जाना

'आशिक़ की आबरू है गाली और मार खाना

प्यार में गालियाँ और मार खाना सम्मान की बात समझी जाती है, प्यार की विशेषता अभिव्यक्त करते समय कहते हैं

मुफ़्त की हाए हो

ख़रगोश के सींग की तरह ग़ायब हो जाना

ख़रगोश के सींग नहीं होते यानी ये ना मुम्किनात में से है संसार जब अपने बाहरी रूप के साथ ख़रगोश के सींग की तरह ग़ायब हो जाता है और सिर्फ़ सत ही सतरह जाता है तब वही सत सामान्य है

साठ सासें नंद हों सौं, माँ की हवा न अनसों हो

चाहे साठ सास / सासें और नंद हूँ माँ के बराबर नहीं हो सकतीं

साठ सास नंद हों सौं, माँ की होर न अनसों हो

चाहे साठ सास / सासें और नंद हूँ माँ के बराबर नहीं हो सकतीं

साठ सास नंद हों सौं, माँ की होर न अनसों हो

चाहे साठ सास / सासें और नंद हूँ माँ के बराबर नहीं हो सकतीं

होंटों की मिस्सी पोंछो

बात करने का सलीक़ा सीखो, सलीक़े से बात करो , औरतों की सी बातें मत करो , ज़नाने ना बनू (दिल्ली के बांके अपने हरीफ़ नौजवान से मुक़ाबले के वक़्त कहते हैं

झूटे पर ख़ुदा की मार

(बददुआ के तौर पर बोलते हैं) जो झूट बोले इस का सत्यानास हो

का'बा हो तो उस की तरफ़ मुँह न करूँ

किसी जगह से इस क़दर बेज़ार और तंग होना कि अगर वो जगह मुक़ाम मुक़द्दस और ख़ुदा का घर भी बिन जाये तो उधर का रुख़ ना करना ग़रज़ निहायत बेज़ार तंग और आजिज़ हो जाने के मौक़ा पर ये फ़िक़रा बोला जाता है

बाज़ार की मिठाई से निरबाह नहीं हो सकता

आरिज़ी चीज़ ख़ुसूसन बाज़ारी औरत से सदा काम नहीँ चल सकता, इंसान हमेशा अय्याशी नहीं कर सकता अख़ीतर में नुक़्सान उठाता है

कबाब की सीख़ हो जाना

दुबला पुतला हो जाना, निहायत लाग़र हो जाना

पाँव की च्यूँटी तक दुशमन हो जाना

अदना और हक़ीर (मुलाज़िम नौकर वग़ैरा) का मुख़ालिफ़त पर आमादा हो जाना

नमक की मार पड़ना

किस बाग़ की मूली हो

मेरे सामने तुम क्या बेचते हो, तुम कोई हक़ीक़त नहीं रखते

कमज़ोर का ग़ुस्सा मार खाने की निशानी

ज़बरदस्त हमेशा दबा रहता है, जिस का कोई पुर्साने हाल ना हो उस को सब दबाते हैं

चाँद की तरफ़ पाँव हो जाना

नसीबों की बलिया पकाई खीर, हो गया दल्या

जब क़िस्मत ख़राब हो तो अच्छा काम भी बुरा हो जाता है

नमक की कान में नमक हो जाना

जैसा माहौल हो वैसा ही बन जाना, माहौल में ढल जाना, कहीं और के रस्म-ओ-रिवाज के मुताबिक़ अत्वार अपना लेना, ख़ुद को बदल लेना, घुल मिल जाना

साधू हो कर करे जो जारी , उस की हो दो जग में ख़्वारी

फ़क़ीर हो कर बदमाशी और बदकारी करे, दोनों जहां में ख़राब-ओ-ख़ार होगा

जिस बहुअर की बहरी सास, उस का कभी न हो घर वास

जिस स्त्री की सास बहरी हो, वह कभी घर में नहीं रुकती

होंटों की सी पूछो

होंटों की मिस्सी पोछो

बात करने का सलीक़ा सीखो, सलीक़े से बात करो , औरतों की सी बातें मत करो , ज़नाने ना बनू (दिल्ली के बांके अपने हरीफ़ नौजवान से मुक़ाबले के वक़्त कहते हैं

उस जातक से करो न यारी, जिस की माता हो कलहारी

उस लड़के से कभी मित्रता या प्रेम मत करो जिसकी माँ लड़ाका अर्थात झगड़ालू हो

तुरत-फुरत हो वो भी कार मदद करे जिस की सरकार

जिस काम में ईश्वर की सहायता हो वह जल्द हो जाता है

होंटों की तरी

हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में 'अली की तेग़ की मार हो के अर्थदेखिए

'अली की तेग़ की मार हो

'alii kii teG kii maar hoعَلی کی تیغ کی مار ہو

वाक्य

देखिए: 'अली की तैग़ पड़े

'अली की तेग़ की मार हो के हिंदी अर्थ

  • (कोसना) रुक : अली की तेग़ पड़े
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عَلی کی تیغ کی مار ہو کے اردو معانی

  • (کوسنا) رک : علی کی تیغ پڑے .

संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .

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'अली की तेग़ की मार हो

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