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कोई कौड़ी के दो बेर भी हाथ से न खाए

सख़्त ज़लील-ओ-बेवुक़त है

हाथ से कोड़ी के दो बेर भी न खाना

बड़ी नाक़द्री करना

आँधी के बेर

बूर के लड्डू खाए सो पछताए , न खाए सो पछताए

ऐसा काम जिस के ना करने में हसरत रहे और करने में पछतावा हो। (तग़य्युर फे़अल के साथ भी मुस्तामल है)

भाप भी मुँह से न निकालना

अत्यंत गोपनीयता से काम लेना, बहुत गोपनीयता बरतना

काँटे बोए बबूल के तो आम कहाँ से खाए

बुरा काम करके भलाई की आशा रखना, फ़ुज़ूल और मुर्खतापूर्ण क्रिया है, जैसा बोओगे वैसा काटोगे, जौ बोओ गे तो गेहूं कैसे काटोगे, जौ बोओगे तो जौ ही काटोगे

दो-चार के हाथ जाना

(किसी शैय का) मुस्तामल होजाना

कोई-न-कोई

एक ना एक, कोई न कोई, कोई व्यक्ति, कोई सा, ये नहीं वो

कोई भी माँ के पेट से तो ले कर नहीं निकलता है

हर व्यक्ति को सीखना पड़ता है, जन्मजात विद्वान कोई नहीं होता, काम करने से ही आता है, कोई माँ के पेट से सीख कर नहीं आता

कम खाए ग़म न खाए

ग़म इंसान को तहलील करदेता है, क़र्ज़ लेकर खाने से कम खाना या फ़ाक़ा भला, कम खाने से आदमी नहीं मरता बल्कि ग़म उसे तबाह करदेता है, मुराद ये है कि कम खाने वाले को कोई ग़म नहीं होता, बीमारी से भी महफ़ूज़ रहता है और अख़राजात भी कम होते हैं

पकाए सो खाए नहीं , खाए कोई और

जो मुहब्बत करे कागा फ़ायदा उठाएगा

जान जाए ख़राबी से हाथ न उठे रकाबी से

बहुत लालची या पेटू आदमी की निसबत बोलते हैं

एक-एक के दो-दो

हुमायूँ को हाथ से न देना

हौसला ना हारना

दो-दो हाथ

दो हाथ के बराबर, बहुत ज़्यादा (लम्बाई चौड़ाई के लिहाज़ से)

मौक़ा' हाथ से न देना

समय पर लाभ उठाना, अवसर को हाथ से न खोना

बाज़ार का सत्तू बाप भी खाए, बेटा भी खाए

तवाइफ़, रंडी, कसबी

कोई कहाँ से लाए

۔नापैद होने और मजबूरी ज़ाहिर करने के लिए।

'अशर-ए-'अशीर भी न होना

खाए तो पछताए, न खाए तो पछताए

ऐसी वस्तु जो वास्तव में अच्छी न हो, पर उसे अच्छी समझकर सब पाने के लिए लालायित भी हों

मूँढे भी अपने और हाथ भी अपने

इख़तियार हर तरह से अपने क़ाबू में है जैसा चाहें करें कोई रोक टोक करने वाला नहीं

एक हाथ बिखेरो, दो से समेटो

कोई काम ख़राब हो जोए तो बहुत प्रयास के बाद ठीक होता है, काम बिगाड़ना सरल है और ठीक करना कठिन

दो-दो हाथ चलना

झड़प होना, लड़ाई होना

दो-हाथ

बहुत निकट, दो हाथों की दूरी पर, मंज़िल के बहुत क़रीब

हाथ से दूसरे हाथ को ख़बर न हो

किसी को कानों कान ख़बर नहप हो कि क्या दिया और किस को दिया

हम भी कोई हैं

हम से भी कोई रिश्ता और ख़ुसूसीयत है , हमारा भी बड़ा मर्तबा है

अमीर के पास क़ब्र भी न हो

रुक: अमीर के पड़ोस में ख़ुदा क़ब्र भी ना बनवाए

भूके बेर उघाने गाँडा तुसपर खाएँ मूली का खाँडा

भूक में सब कुछ ग़नीमत है

कौड़ी के दो-दो बिकना

रुक : कोड़ी के तीन तीन बकना

हमारी बेरी में भी बेर लगेंगे

कभी हम से भी तुम को काम पड़ेगा

ये भी दाम ग़ुलामों खाए , ये भी बैगन काट पकाए

यानी हमें सब तरह का तजुर्बा होगया और हम तुम्हारी सब चालाकियां पहचान गए

नक्टे का खाए उकटे का न खाए

कमीने का एहसानमंद नहीं होना चाहिए, अदना का एहसान उठाए कमज़र्फ़ का नहीं

साँप भी मरे , लाठी भी न टूटे

आग भी न लगाऊँ

रुख़ करना या हाथ लगाना भी जुर्म है, किसी सूरत भी काबिल-ए-क़बूल नहीं. (किसी चीज़ से इंतिहाई नफ़रत ज़ाहिर करने के मौक़ा पर मुस्तामल)

ये भी कोई बात है

बेकार की बात है, ये बात अर्थहीन है, बेमौक़ा है

दो-दो हाथ देखना

मुक़ाबला करना, लड़ना, ताक़त आज़माई करना

दो-दो हाथ दिखाना

आज़माईश के तौर पर लड़ना, ज़ोर आज़माई करना, मुक़ाबिल में आना

बद बदी से न जाए तो नेक नेकी से भी न जाए

चाहे बुरा आदमी अपनी बुराई से बाज़ ना आए मगर नेक को अपनी नेकी नहीं छोड़ना चाहिए

मुझ से भी टाँच लाए

मुझ से भी नाहक़ झगड़ा क्या या लड़ पड़े

दो-दो हाथ उछलना

निहायत बेताब होना, बहुत ज़्यादा तड़पना

हाथ न पहुँचना

किसी काम में कामयाबी ना होना , मक़सद हासिल ना होना , किसी जगह हाथ ना जा सकना, (जगह तंग होने या ऊंची होने के सबब) हाथ की रसाई ना होना

दो भी नहीं

एक भी नहीं, मुतलक़ कोई नहीं, थोड़े से भी नहीं

भनंग भी न पहुँचना

कानों कान ख़बर ना होना

नकटे का खाए ओझे का न खाए

धर्म-हार धान कोई खाए

बेईमानी से हर कोई कमा खाता है

जंगली-बेर

ये भी न हुआ वो भी न हुआ

कुछ फ़ासिला ना हुआ, दोनों में से कोई काम ना बना, कोई मुराद भी हासिल ना हुई

झूटा भी खाए मीठे के लालच

मकरूह चीज़ किसी मज़े की ख़ाबर खाई जाती है, इंसान कोई तकलीफ़ उठाता बा बुरा काम या बरी बात करता है तो हम किसी फ़ाइदे या लालच के लिए

खाए तो मुँह लाल , न खाए तो मुँह लाल

अगर पानी से घी निकले तो कोई रूखी न खाए

दो-दो हाथ लड़ना

मुक़ाबले के लिए निकलना, मुक़ाबला करना, आज़माईशी तौर पर मद-ए-मुक़ाबिल होना

झड़-बेर

माँ के पेट से ले कर कोई नहीं आता

सीखा सिखाया कोई नहीं पैदा होता, काम सीखने ही से आता है

माँ के पेट से सीख कर कोई नहीं आता

सीखा सिखाया कोई नहीं पैदा होता, काम सीखने ही से आता है

एक एक के दो दो होना

तिजारत में दोना या कई गुना नफ़ा होना

तेरे तोड़े तो मैं बेर भी न खाऊँ

(ओ) मुझे तुझ से नफ़रत है यानी तो अगर बेरों को छोले तो में खाऊं

हम अभी से फ़ातिहा के लिए हाथ उठाते हैं

(महिला) जब कोई झूट-मूट मरने की धमकी देता है तो औरतें कहती हैं

दो मूँ के लोगाँ

पाखंडी

घर आए बेरी को भी न मारिए

जो व्यक्ति घर पर आ जाए उस के साथ बुरा व्यवहार नहीं करते, भले ही वह शत्रु क्यों न हो

खाए तो मुँह लाल, न खाए तो मुँह लाल

इस शख़्स की निसबत बोलते जो जुर्म करे या ना करे हर हालत में इल्ज़ाम उसी पर लगाया जाये, बदनाम शख़्स कोई क़सूर करे या ना करे इल्ज़ाम उसी पर आता है

हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में कोई कौड़ी के दो बेर भी हाथ से न खाए के अर्थदेखिए

कोई कौड़ी के दो बेर भी हाथ से न खाए

ko.ii kau.Dii ke do ber bhii haath se na khaa.eکوئی کَوڑی کے دو بیر بھی ہاتھ سے نَہ کھائے

कहावत

कोई कौड़ी के दो बेर भी हाथ से न खाए के हिंदी अर्थ

 

  • सख़्त ज़लील-ओ-बेवुक़त है
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کوئی کَوڑی کے دو بیر بھی ہاتھ سے نَہ کھائے کے اردو معانی

 

  • سخت ذلیل و بے وقعت ہے.

सूचनार्थ: औपचारिक आरंभ से पूर्व यह रेख़्ता डिक्शनरी का बीटा वर्ज़न है। इस पर अंतिम रूप से काम जारी है। इसमें किसी भी विसंगति के संदर्भ में हमें dictionary@rekhta.org पर सूचित करें। या सुझाव दीजिए

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कोई कौड़ी के दो बेर भी हाथ से न खाए

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