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पड़ती
कोई ऐसी खाली पड़ी हुई जमीन जो कभी जोती-बोई तो न गई हो, मगर प्रयत्नपूर्वक खेतीवाड़ी के योग्य बनाई जा सकती हो
कहीं बूढ़े तोते भी पढ़ते हैं
हर बात अपने वक़्त हर मुनासिब होती है, बूढ़ों की तर्बीयत नहीं हो सकती, हर काम या फ़न की तहसील का ज़माना मुक़र्रर है, इस के गुज़रने के बाद इस का हुसूल मुश्किल होता है
तोता पढ़े मैना पढ़े , कहीं आदमी के बच्चे भी पढ़ते हें
ये व्यंग्य करते हुए उन योग्य बच्चों के बारे में कहा जाना है जो पढ़ने-लिखने से जी चुराते हैं और अपना पूरा मन नहीं लगाते आशय यह है कि जब पक्षी पढ़ सकते हैं तो मनुष्य के लिए पढ़ना क्या कठिन है
चाँद पर ख़ाक नहीं पड़ती
जब कोई किसी निष्कलंक को दोष के साथ दोषी ठहराए तो कहावत है, अच्छे बुरे नहीं हो सकते, अच्छों को दोष नहीं लग सकता, प्रतिभा छुपाई नहीं छुपती
वक़्त पर सब कुछ करना पड़ता है
जब मौक़ा आ जाए और ज़रूरत पड़ जाए तो जो कुछ हो सकता हो करना चाहिए, मजबूरी में हर काम करना ही पड़ता है
आदमी को आदमी से सौ दफ़'आ काम पड़ता है
जब कोई किसी का काम करने से बचे तो उसे मनाने के लिए कहते हैं कि मनुष्य ही मनुष्य के काम आता है
वक़्त पर गधे को बाप बनाना पड़ता है
मुसीबत या ज़रूरत के समय घटिया से घटिया और छोटे से छोटे की ख़ुशामद करना पड़ती है
करते धरते बन नहीं पड़ती
۔کچھ کام نہیں ہوسکتا۔ کچھ کرتے بن نہیں پڑتا۔ ماں بے چاری عجیب مشل میں تھی کچھ کرتے دھرتے بن نہ آتی تھی۔
आदमी पर जैसी पड़ती है वैसा सहता है
फ़ारसी की प्रसिद्ध पंक्ति: बरसर-ए-फ़र्ज़ंद आदम हर चे आयद बगुज़रद का अनुवाद उर्दू में प्रयुक्त
चाँद पर ख़ाक डालने से नहीं पड़ती
जब कोई किसी निष्कलंक को दोष के साथ दोषी ठहराए तो कहावत है, अच्छे बुरे नहीं हो सकते, अच्छों को दोष नहीं लग सकता, प्रतिभा छुपाई नहीं छुपती
ग़रज़ के लिए गधे को बाप बनाना पड़ता है
ज़रूरतमंद को मतलबी की भी ख़ुशामद करनी पड़ती है, ज़रूरतमंद को अपमानजनक काम करना पड़ता है
ज़रूरत के वक़्त गधे को भी बाप बनाना पड़ता है
विवशता में हर किसी की चापलूसी करनी पड़ती है, लाचारी की स्थिति में आदमी को सब कुछ करना पड़ता है, विवशता के समय अपने से निम्न व्यक्ति की भी चापलूसी करना पड़ती है
घोड़े की हँसी और बालक का दुख जान नहीं पड़ता
घोड़े की हँसी और बच्चे की तकलीफ़ मा'लूम नहीं होती क्यूँकि ये बता नहीं सकते
दुधार गाय की दो लातें भी पड़ती हैं
लाभ पहुँचाने वाले की घुड़कियाँ भी सही जाती हैं, काम करने वाले या कमाऊ व्यक्ति की दो कड़वी बातें भी सही जाती हैं
जो ख़ुदा सर पर दो सींग दे तो वो भी सहने पड़ते हैं
जो कष्ट आए वो झेलना ही पड़ता है, ईश्वर की प्रसन्नता में प्रसन्न रहना अच्छी बात है
जो ख़ुदा सर पर सींग दे तो वो भी सहने जाते हैं
ईश्वर की डाली मुसीबत सहनी पड़ती है, ईश्वर का दिया कष्ट भी स्वीकार है, ईश्वरेच्छा पर सहमत होना चाहिए
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