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kyak

क्या क्या

(استفہام کے لیے) کیا کچھ ، کون کون ، کون سا کون سا (چیز ، کام وغیرہ).

क्या किया

۔۱۔ بڑا غضب کیا۔ بڑا ستم کیا۔ بڑی حیرت ہے۔ نہایت شرم کی بات ہے۔ ؎ ۲۔ کوئی بے جا بات نہیں کی۔ اُنھوں نے خط واپس کردیا تو کیا کیا۔ ۳۔ کس صرف میں لایا۔ ؎

क्या कहा

(जब कोई अनुचित रूप से कुछ कहता है, तो उसे व्यंग्य में कहते है) फिर से कहना, सही नहीं कहा

क्या कहना

सुब्हान अल्लाह, प्रशंसा के लिए, प्रशंसा नहीं होसकती, व्यंग के लिए (कटाक्ष एवं प्रशंसा दोनों के लिए प्रयुक्त)

क्या कहने

रुक : क्या कहना, क्या बात है (बेशतर तंज़न मुस्तामल)

क्या करे

क्या उपचार करे

क्या कहूँ

मजबूर हूँ, विवश हूँ, कुछ नहीं कह सकता

क्या कहिए

(मजबूरी और बेबसी के लिए) कुछ नहीं कह सकते, जाने दीजीए

क्या कहीं

۔ (مجبوری اور بے بسی ظاہر کرنے کے لئے) کیا بیان کریں۔ کیا شکایت کریں۔ قابل بیان نہیں۔ (درد) ہوا جو کچھ کہ ہونا تھا۔) کہیں کیا جی کو رو بیٹھے۔

क्या कहेगा

लॉन तान करेगा, हंसी उड़ाएगा, शर्मिंदा करेगा

क्या करें

कैसे करें, नहीं कर सकते, मजबूरी है

क्या कुछ

बहुत कुछ, क्या क्या, कितना

क्या करूँ

अचंभित हूँ, कुछ समझ में नहीं आता, मजबूर हूँ, विवश हूँ

क्या करेगा

रुक : क्या कर लेगा, कुछ नहीं कर सकता

क्या कहेंगे

क्या सोचेंगे, क्या शक करेंगे, बुरा कहेंगे, क्या ख़्याल करेंगे, क्या शुबह करेंगे

क्या काम

कुछ काम नही, संबंध या उद्देश्य नहीं

क्या ख़ाक

ख़ाक नहीं, कुछ नहीं, क्यों कर, कैसे, किस उमीद पर

क्या ख़बर

कुछ ख़बर नहीं, मालूम नहीं, क्या मालूम

kayak

खालोन से बनी डोंगी

क्या कीजे

हैरान हैं, कुछ समझ में नहीं आता, क्या करें, महबोर हैं

क्या ख़ूब

बेशतर शेअर की तारीफ़ में मुस्तामल

क्या क्या कुछ

کیا کچھ، بہت کچھ

क्या कहता है

(तरदीद के मौक़ा पर मुस्तामल) ये बात दरुस्त नहीं, क्या बात कहता है य इकया इल्ज़ाम लगाता है

क्या कहा है

(प्रशंसा के अवसर पर) क्या अच्छी कविता कही है, वाह वाह, सुबहान अल्लाह

क्या करता है

ऐसा ना कर, बेजा फे़अल करता है, ना कर, बाज़ रह , किया मशग़ला रखता है, क्या काम करता है

क्या कीजिए

हैरान हैं, कुछ समझ में नहीं आता, क्या करें, महबोर हैं

क्या खाए

۔ کس برتے پر۔ بھلا ہم غریب آدمی کو ایسی ویسی باتوں کی کیا قدر میکے سے سُسرال تک نون تیل لکڑی ہی سے زمانہ فرصت نہیں دیتا۔ بھلام ہم دوسری کی بات کی کیا خبر سکتے ہیں اور کیا کھا کے کوئی بات کرسکتے ہیں۔

क्या क्या कहेगा

सब कुछ कह देगा, कुछ नहीं छुपाएगा, बढ़ा-चढ़ाकर कहेगा (राज़ खुल जाने के डर से कहते हैं)

क्या ख़ातिर

किस वास्ते, किस लिए

क्या कहना है

(तहसीन नीज़ तंज़ के लिए मुस्तामल) सुबहान अल्लाह, वाह वाह, कोई जवाब नहीं, बहुत ख़राब है, बहुत ख़ूब है

क्या कह के

کیا کلماتِ تشفی کہہ کے، کس من٘ھ سے

क्या ख़ुदा है

ऐसा शख़्स नहीं जिस से सरताबी ना हो सकती हो

क्या काम है

۔کچھ کام نہیں۔ کیا واسطہ۔ کیا علاقہ۔ شادی کے موقع پر رنج کی باتوں کا کیا کام ہے۔ ؎

क्या खा के

کس بِرتے پر ، کس طرح .

क्या कम है

पहले ही बहुत कुछ है; काफ़ी है, क्या मौजूदा अत्याचार पर्याप्त नहीं है जो और करते हो

क्या ख़ाक है

कुछ भी नहीं है, कुछ मयस्सर नहीं, बिलकुल ख़ाली है (इंतिहाई महरूमी के आलम में कहते हैं)

क्या ख़ुदाई है

ईश्वर की महिमा और शक्ति का क्या कहना, इश्वर की क्या महिमा है (आश्चर्य, व्यंग और ताना के लिए बोलते हैं)

क्या क्या कहेंगे

क्या कहेंगे, बुरा कहेंगे, बहुत कुछ कहेंगे

क्या कहने हैं

۔کیا بات ہے۔ بیشتر طنز سے بھی مستعمل ہے۔ ؎

क्या कमी है

कोई कमी नहीं, सब कुछ है, बहुत कुछ है

क्या क्या गुज़रा

क्या क्या मुसीबत पेश आई, क्या क्या वाक़िया पेश आया

क्या कोसूँ

(बहुत अधिक अप्रसन्नता और ईर्ष्या के समय पर कहते हैं) मैं क्या बुरा-भला कहूँ, क्या दुआएँ दूँ

क्या कम था

पहले ही बहुत थे, काफ़ी था, अब और हो गया (ज़्यादती ज़ाहिर करने के मौक़ा पर मुस्तामल)

क्या कम थे

पहले ही बहुत थे, काफ़ी था, अब और हो गया (ज़्यादती ज़ाहिर करने के मौक़ा पर मुस्तामल)

क्या कम थी

पहले ही बहुत थे, काफ़ी था, अब और हो गया (ज़्यादती ज़ाहिर करने के मौक़ा पर मुस्तामल)

क्या कर लेगा

कुछ नहीं कर सकता, क्या नुक़्सान पहुंचाएगा

क्या खा कर

کس بِرتے پر ، کس طرح .

क्या कर लिया

क्या नुक़्सान पहूँचा या क्या बिगाड़ लिया, कुछ न कर सका

क्या क्या न किया

۔सब कुछ किया। कौन सी कसर उठा रखी। (मज़मून) हम ने किया क्या ना तिहरे इशक़ में महबूब किया। सब्र एवबऑ किया गिरिया-ए-याक़ूब किया

क्या ख़ूब है

कितना अच्छा हो, क्या ही अच्छा हो, मज़ा आ जाए

क्या कत्ता है

क्या बाजी है

क्या क्या न हुआ

कौन सी बात रह गई, कौन सा अपमान न हुआ, कौन सी रुसवाई न हुई

क्या कलाम है

कोई असमंजस, नहीं कोई अतिशयोक्ति नहीं

क्या ख़ाक रहा

(व्यंगात्मक) कुछ नहीं बचा, कुछ नहीं रहा

क्या क्या गुज़री

क्या क्या मुसीबत पेश आई, क्या क्या वाक़िया पेश आया, क्या मुसीबत आई

क्या क्या इरादे थे

बहुत इरादे थे, हसरत न निकली

क्या ख़ूब सौदा नक़्द है इस हाथ दे उस हाथ ले

जैसा करोगे वैसा भरोगे

क़ाएँ-क़ाँ

رک : قائیں قائیں.

क्या ख़ूब आदमी था

जब किसी अच्छे व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी प्रशंसा की जाती है, तो यह वाक्य उसकी प्रशंसा में कहा जाता है (कुछ लोग ज़ौक़ के पूरे मिसरे को पढ़ते हैं)

kyak के लिए उर्दू शब्द

kyak

kyak के देवनागरी में उर्दू अर्थ

  • कायाक / काएक
  • कुतुबी अमरीका की मछली पकड़ने की क्षति या डोंगी जो सेल की खालों से बनाई जाती है, ये खालें लक्कड़ी के एक ढाँचे के गर्द मंढी होती हैं, बीच में दायरे की शक्ल की खुली जगह सवार के बैठने के लिए होती है

संज्ञा

  • देखिए: kyac

kyak کے اردو معانی

  • کایاک / کایک
  • قطبی امریکہ کی مچھلی پکڑنے کی کشتی یا ڈونگی جو سیل کی کھالوں سے بنائی جاتی ہے، یہ کھالیں لکڑی کے ایک ڈھانچے کے گرد منڈھی ہوتی ہیں، بیچ میں دائرے کی شکل کی کھلی جگہ سوار کے بیٹھنے کے لیے ہوتی ہے

اسم

  • دیکھیے: kyack

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kyak

क्या क्या

(استفہام کے لیے) کیا کچھ ، کون کون ، کون سا کون سا (چیز ، کام وغیرہ).

क्या किया

۔۱۔ بڑا غضب کیا۔ بڑا ستم کیا۔ بڑی حیرت ہے۔ نہایت شرم کی بات ہے۔ ؎ ۲۔ کوئی بے جا بات نہیں کی۔ اُنھوں نے خط واپس کردیا تو کیا کیا۔ ۳۔ کس صرف میں لایا۔ ؎

क्या कहा

(जब कोई अनुचित रूप से कुछ कहता है, तो उसे व्यंग्य में कहते है) फिर से कहना, सही नहीं कहा

क्या कहना

सुब्हान अल्लाह, प्रशंसा के लिए, प्रशंसा नहीं होसकती, व्यंग के लिए (कटाक्ष एवं प्रशंसा दोनों के लिए प्रयुक्त)

क्या कहने

रुक : क्या कहना, क्या बात है (बेशतर तंज़न मुस्तामल)

क्या करे

क्या उपचार करे

क्या कहूँ

मजबूर हूँ, विवश हूँ, कुछ नहीं कह सकता

क्या कहिए

(मजबूरी और बेबसी के लिए) कुछ नहीं कह सकते, जाने दीजीए

क्या कहीं

۔ (مجبوری اور بے بسی ظاہر کرنے کے لئے) کیا بیان کریں۔ کیا شکایت کریں۔ قابل بیان نہیں۔ (درد) ہوا جو کچھ کہ ہونا تھا۔) کہیں کیا جی کو رو بیٹھے۔

क्या कहेगा

लॉन तान करेगा, हंसी उड़ाएगा, शर्मिंदा करेगा

क्या करें

कैसे करें, नहीं कर सकते, मजबूरी है

क्या कुछ

बहुत कुछ, क्या क्या, कितना

क्या करूँ

अचंभित हूँ, कुछ समझ में नहीं आता, मजबूर हूँ, विवश हूँ

क्या करेगा

रुक : क्या कर लेगा, कुछ नहीं कर सकता

क्या कहेंगे

क्या सोचेंगे, क्या शक करेंगे, बुरा कहेंगे, क्या ख़्याल करेंगे, क्या शुबह करेंगे

क्या काम

कुछ काम नही, संबंध या उद्देश्य नहीं

क्या ख़ाक

ख़ाक नहीं, कुछ नहीं, क्यों कर, कैसे, किस उमीद पर

क्या ख़बर

कुछ ख़बर नहीं, मालूम नहीं, क्या मालूम

kayak

खालोन से बनी डोंगी

क्या कीजे

हैरान हैं, कुछ समझ में नहीं आता, क्या करें, महबोर हैं

क्या ख़ूब

बेशतर शेअर की तारीफ़ में मुस्तामल

क्या क्या कुछ

کیا کچھ، بہت کچھ

क्या कहता है

(तरदीद के मौक़ा पर मुस्तामल) ये बात दरुस्त नहीं, क्या बात कहता है य इकया इल्ज़ाम लगाता है

क्या कहा है

(प्रशंसा के अवसर पर) क्या अच्छी कविता कही है, वाह वाह, सुबहान अल्लाह

क्या करता है

ऐसा ना कर, बेजा फे़अल करता है, ना कर, बाज़ रह , किया मशग़ला रखता है, क्या काम करता है

क्या कीजिए

हैरान हैं, कुछ समझ में नहीं आता, क्या करें, महबोर हैं

क्या खाए

۔ کس برتے پر۔ بھلا ہم غریب آدمی کو ایسی ویسی باتوں کی کیا قدر میکے سے سُسرال تک نون تیل لکڑی ہی سے زمانہ فرصت نہیں دیتا۔ بھلام ہم دوسری کی بات کی کیا خبر سکتے ہیں اور کیا کھا کے کوئی بات کرسکتے ہیں۔

क्या क्या कहेगा

सब कुछ कह देगा, कुछ नहीं छुपाएगा, बढ़ा-चढ़ाकर कहेगा (राज़ खुल जाने के डर से कहते हैं)

क्या ख़ातिर

किस वास्ते, किस लिए

क्या कहना है

(तहसीन नीज़ तंज़ के लिए मुस्तामल) सुबहान अल्लाह, वाह वाह, कोई जवाब नहीं, बहुत ख़राब है, बहुत ख़ूब है

क्या कह के

کیا کلماتِ تشفی کہہ کے، کس من٘ھ سے

क्या ख़ुदा है

ऐसा शख़्स नहीं जिस से सरताबी ना हो सकती हो

क्या काम है

۔کچھ کام نہیں۔ کیا واسطہ۔ کیا علاقہ۔ شادی کے موقع پر رنج کی باتوں کا کیا کام ہے۔ ؎

क्या खा के

کس بِرتے پر ، کس طرح .

क्या कम है

पहले ही बहुत कुछ है; काफ़ी है, क्या मौजूदा अत्याचार पर्याप्त नहीं है जो और करते हो

क्या ख़ाक है

कुछ भी नहीं है, कुछ मयस्सर नहीं, बिलकुल ख़ाली है (इंतिहाई महरूमी के आलम में कहते हैं)

क्या ख़ुदाई है

ईश्वर की महिमा और शक्ति का क्या कहना, इश्वर की क्या महिमा है (आश्चर्य, व्यंग और ताना के लिए बोलते हैं)

क्या क्या कहेंगे

क्या कहेंगे, बुरा कहेंगे, बहुत कुछ कहेंगे

क्या कहने हैं

۔کیا بات ہے۔ بیشتر طنز سے بھی مستعمل ہے۔ ؎

क्या कमी है

कोई कमी नहीं, सब कुछ है, बहुत कुछ है

क्या क्या गुज़रा

क्या क्या मुसीबत पेश आई, क्या क्या वाक़िया पेश आया

क्या कोसूँ

(बहुत अधिक अप्रसन्नता और ईर्ष्या के समय पर कहते हैं) मैं क्या बुरा-भला कहूँ, क्या दुआएँ दूँ

क्या कम था

पहले ही बहुत थे, काफ़ी था, अब और हो गया (ज़्यादती ज़ाहिर करने के मौक़ा पर मुस्तामल)

क्या कम थे

पहले ही बहुत थे, काफ़ी था, अब और हो गया (ज़्यादती ज़ाहिर करने के मौक़ा पर मुस्तामल)

क्या कम थी

पहले ही बहुत थे, काफ़ी था, अब और हो गया (ज़्यादती ज़ाहिर करने के मौक़ा पर मुस्तामल)

क्या कर लेगा

कुछ नहीं कर सकता, क्या नुक़्सान पहुंचाएगा

क्या खा कर

کس بِرتے پر ، کس طرح .

क्या कर लिया

क्या नुक़्सान पहूँचा या क्या बिगाड़ लिया, कुछ न कर सका

क्या क्या न किया

۔सब कुछ किया। कौन सी कसर उठा रखी। (मज़मून) हम ने किया क्या ना तिहरे इशक़ में महबूब किया। सब्र एवबऑ किया गिरिया-ए-याक़ूब किया

क्या ख़ूब है

कितना अच्छा हो, क्या ही अच्छा हो, मज़ा आ जाए

क्या कत्ता है

क्या बाजी है

क्या क्या न हुआ

कौन सी बात रह गई, कौन सा अपमान न हुआ, कौन सी रुसवाई न हुई

क्या कलाम है

कोई असमंजस, नहीं कोई अतिशयोक्ति नहीं

क्या ख़ाक रहा

(व्यंगात्मक) कुछ नहीं बचा, कुछ नहीं रहा

क्या क्या गुज़री

क्या क्या मुसीबत पेश आई, क्या क्या वाक़िया पेश आया, क्या मुसीबत आई

क्या क्या इरादे थे

बहुत इरादे थे, हसरत न निकली

क्या ख़ूब सौदा नक़्द है इस हाथ दे उस हाथ ले

जैसा करोगे वैसा भरोगे

क़ाएँ-क़ाँ

رک : قائیں قائیں.

क्या ख़ूब आदमी था

जब किसी अच्छे व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी प्रशंसा की जाती है, तो यह वाक्य उसकी प्रशंसा में कहा जाता है (कुछ लोग ज़ौक़ के पूरे मिसरे को पढ़ते हैं)

संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .

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