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kayak

खालोन से बनी डोंगी

कया करना

कोई अपराध नहीं, कोई ग़लती नहीं, कुछ नहीं किया

किया-कराया

(काम) पहले से ही किया हुआ

काया-कष्ट

Physical affliction, physical disease.

काया-कलप

कोई ऐसी क्रिया या व्यवस्था जिससे काया की पूरी तरह से शुद्धि हो जाए और वह अपना काम ठीक तरह से करने लगे, वैद्यक में इस तरह से प्रयोग की गई विधि या औषधि जिससे वृद्ध शरीर में भी नई शक्ति या नया यौवन आ जाता है, शरीर का पूर्णरूप से निरोगी हो जाना

क्या क्या

(استفہام کے لیے) کیا کچھ ، کون کون ، کون سا کون سا (چیز ، کام وغیرہ).

क्या किया

۔۱۔ بڑا غضب کیا۔ بڑا ستم کیا۔ بڑی حیرت ہے۔ نہایت شرم کی بات ہے۔ ؎ ۲۔ کوئی بے جا بات نہیں کی۔ اُنھوں نے خط واپس کردیا تو کیا کیا۔ ۳۔ کس صرف میں لایا۔ ؎

क़ाएँ-क़ाँ

رک : قائیں قائیں.

kyak

काया कष्ट है जान जोखों नहीं

बदन की तकलीफ़ है जान का ख़तरा नहीं

काया किश्त है जान जोखों नहीं

बदन की तकलीफ़ है जान का ख़तरा नहीं

काएं-काएं

कव्वे की आवाज़

क्या कहा

(जब कोई अनुचित रूप से कुछ कहता है, तो उसे व्यंग्य में कहते है) फिर से कहना, सही नहीं कहा

क्या कहना

सुब्हान अल्लाह, प्रशंसा के लिए, प्रशंसा नहीं होसकती, व्यंग के लिए (कटाक्ष एवं प्रशंसा दोनों के लिए प्रयुक्त)

क्या कहने

रुक : क्या कहना, क्या बात है (बेशतर तंज़न मुस्तामल)

क्या कहेगा

लॉन तान करेगा, हंसी उड़ाएगा, शर्मिंदा करेगा

क्या कुछ

बहुत कुछ, क्या क्या, कितना

क़ाएँ-क़ाएँ

बत या कौवे की आवाज़, काएँ काएँ

क्या करे

क्या उपचार करे

क्या करेगा

रुक : क्या कर लेगा, कुछ नहीं कर सकता

किया करना

लगातार या हमेशा कोई काम करना

क्या कहूँ

मजबूर हूँ, विवश हूँ, कुछ नहीं कह सकता

क्या कहिए

(मजबूरी और बेबसी के लिए) कुछ नहीं कह सकते, जाने दीजीए

क्या कहेंगे

क्या सोचेंगे, क्या शक करेंगे, बुरा कहेंगे, क्या ख़्याल करेंगे, क्या शुबह करेंगे

क्या करें

कैसे करें, नहीं कर सकते, मजबूरी है

क्या करूँ

अचंभित हूँ, कुछ समझ में नहीं आता, मजबूर हूँ, विवश हूँ

क्या कहीं

۔ (مجبوری اور بے بسی ظاہر کرنے کے لئے) کیا بیان کریں۔ کیا شکایت کریں۔ قابل بیان نہیں۔ (درد) ہوا جو کچھ کہ ہونا تھا۔) کہیں کیا جی کو رو بیٹھے۔

क्यूँकर

because, why

हक़ाइक़-आगाह

حقیقتوں کا جاننے والا، عارف.

हक़ाइक़-आगाह

حقیقتوں کا جاننے والا، عارف.

क्या काम

कुछ काम नही, संबंध या उद्देश्य नहीं

क्या ख़ाक

ख़ाक नहीं, कुछ नहीं, क्यों कर, कैसे, किस उमीद पर

क्या ख़बर

कुछ ख़बर नहीं, मालूम नहीं, क्या मालूम

क्या क्या कुछ

کیا کچھ، بہت کچھ

कोई-कोई

इक्का दुक्का, बहुत कम, एक आध, ख़ाल-ख़ाल

क्या कहता है

(तरदीद के मौक़ा पर मुस्तामल) ये बात दरुस्त नहीं, क्या बात कहता है य इकया इल्ज़ाम लगाता है

क्या ख़ूब सौदा नक़्द है इस हाथ दे उस हाथ ले

जैसा करोगे वैसा भरोगे

क्या कहा है

(प्रशंसा के अवसर पर) क्या अच्छी कविता कही है, वाह वाह, सुबहान अल्लाह

क्या क्या कहेगा

सब कुछ कह देगा, कुछ नहीं छुपाएगा, बढ़ा-चढ़ाकर कहेगा (राज़ खुल जाने के डर से कहते हैं)

क्या कीजे

हैरान हैं, कुछ समझ में नहीं आता, क्या करें, महबोर हैं

क्या कहना है

(तहसीन नीज़ तंज़ के लिए मुस्तामल) सुबहान अल्लाह, वाह वाह, कोई जवाब नहीं, बहुत ख़राब है, बहुत ख़ूब है

क्या करता है

ऐसा ना कर, बेजा फे़अल करता है, ना कर, बाज़ रह , किया मशग़ला रखता है, क्या काम करता है

क्या ख़ुदा है

ऐसा शख़्स नहीं जिस से सरताबी ना हो सकती हो

क्या क़ुदरत

इतनी क़ुदरत नहीं है, क्या मजाल, क्या ताब

क्या ख़ुदाई है

ईश्वर की महिमा और शक्ति का क्या कहना, इश्वर की क्या महिमा है (आश्चर्य, व्यंग और ताना के लिए बोलते हैं)

क्यूँकि

कारण यह कि, इसलिए कि, चूँकि

क्या खट राग गाते हो

क्या बकवास करते हो, क्या बेहूदा बकते हो

क्या क्या इरादे थे

बहुत इरादे थे, हसरत न निकली

क्या ख़ूब

बेशतर शेअर की तारीफ़ में मुस्तामल

क्या कत्ता है

क्या बाजी है

कया कुत्ते ने काटा था

सर नहीं फिरा था, दिमाग़ नहीं चल गया था

क्या क्या गुज़रा

क्या क्या मुसीबत पेश आई, क्या क्या वाक़िया पेश आया

क्या ख़ातिर

किस वास्ते, किस लिए

क्या खाए

۔ کس برتے پر۔ بھلا ہم غریب آدمی کو ایسی ویسی باتوں کی کیا قدر میکے سے سُسرال تک نون تیل لکڑی ہی سے زمانہ فرصت نہیں دیتا۔ بھلام ہم دوسری کی بات کی کیا خبر سکتے ہیں اور کیا کھا کے کوئی بات کرسکتے ہیں۔

किए की सज़ा पाना

۔ بُری فعل کی سزا پانا۔ ؎

किए की सज़ा पाना

रुक : किए को पाना

क्या खा के

کس بِرتے پر ، کس طرح .

क्या ख़ूब आदमी था

जब किसी अच्छे व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी प्रशंसा की जाती है, तो यह वाक्य उसकी प्रशंसा में कहा जाता है (कुछ लोग ज़ौक़ के पूरे मिसरे को पढ़ते हैं)

क्या ख़ूब आदमी था

۔کسی اچھّے آدمی کا اُس کے مرجانے کے بعد ذکر کرتے ہیں تو یہ کلمہ اس کی تعریف میں کہتے ہیں۔ ؎

क्या कंदा कर सकता है

क्या नुक़्सान पहुंचा सकता है

kayak के लिए उर्दू शब्द

kayak

ˈkaɪ.æk

kayak के देवनागरी में उर्दू अर्थ

संज्ञा

  • कायाक / काएक
  • कुतुबी अमरीका की मछली पकड़ने की क्षति या डोंगी जो सेल की खालों से बनाई जाती है, ये खालें लक्कड़ी के एक ढाँचे के गर्द मंढी होती हैं, बीच में दायरे की शक्ल की खुली जगह सवार के बैठने के लिए होती है

kayak کے اردو معانی

اسم

  • کایاک / کایک
  • قطبی امریکہ کی مچھلی پکڑنے کی کشتی یا ڈونگی جو سیل کی کھالوں سے بنائی جاتی ہے، یہ کھالیں لکڑی کے ایک ڈھانچے کے گرد منڈھی ہوتی ہیں، بیچ میں دائرے کی شکل کی کھلی جگہ سوار کے بیٹھنے کے لیے ہوتی ہے

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kayak

खालोन से बनी डोंगी

कया करना

कोई अपराध नहीं, कोई ग़लती नहीं, कुछ नहीं किया

किया-कराया

(काम) पहले से ही किया हुआ

काया-कष्ट

Physical affliction, physical disease.

काया-कलप

कोई ऐसी क्रिया या व्यवस्था जिससे काया की पूरी तरह से शुद्धि हो जाए और वह अपना काम ठीक तरह से करने लगे, वैद्यक में इस तरह से प्रयोग की गई विधि या औषधि जिससे वृद्ध शरीर में भी नई शक्ति या नया यौवन आ जाता है, शरीर का पूर्णरूप से निरोगी हो जाना

क्या क्या

(استفہام کے لیے) کیا کچھ ، کون کون ، کون سا کون سا (چیز ، کام وغیرہ).

क्या किया

۔۱۔ بڑا غضب کیا۔ بڑا ستم کیا۔ بڑی حیرت ہے۔ نہایت شرم کی بات ہے۔ ؎ ۲۔ کوئی بے جا بات نہیں کی۔ اُنھوں نے خط واپس کردیا تو کیا کیا۔ ۳۔ کس صرف میں لایا۔ ؎

क़ाएँ-क़ाँ

رک : قائیں قائیں.

kyak

काया कष्ट है जान जोखों नहीं

बदन की तकलीफ़ है जान का ख़तरा नहीं

काया किश्त है जान जोखों नहीं

बदन की तकलीफ़ है जान का ख़तरा नहीं

काएं-काएं

कव्वे की आवाज़

क्या कहा

(जब कोई अनुचित रूप से कुछ कहता है, तो उसे व्यंग्य में कहते है) फिर से कहना, सही नहीं कहा

क्या कहना

सुब्हान अल्लाह, प्रशंसा के लिए, प्रशंसा नहीं होसकती, व्यंग के लिए (कटाक्ष एवं प्रशंसा दोनों के लिए प्रयुक्त)

क्या कहने

रुक : क्या कहना, क्या बात है (बेशतर तंज़न मुस्तामल)

क्या कहेगा

लॉन तान करेगा, हंसी उड़ाएगा, शर्मिंदा करेगा

क्या कुछ

बहुत कुछ, क्या क्या, कितना

क़ाएँ-क़ाएँ

बत या कौवे की आवाज़, काएँ काएँ

क्या करे

क्या उपचार करे

क्या करेगा

रुक : क्या कर लेगा, कुछ नहीं कर सकता

किया करना

लगातार या हमेशा कोई काम करना

क्या कहूँ

मजबूर हूँ, विवश हूँ, कुछ नहीं कह सकता

क्या कहिए

(मजबूरी और बेबसी के लिए) कुछ नहीं कह सकते, जाने दीजीए

क्या कहेंगे

क्या सोचेंगे, क्या शक करेंगे, बुरा कहेंगे, क्या ख़्याल करेंगे, क्या शुबह करेंगे

क्या करें

कैसे करें, नहीं कर सकते, मजबूरी है

क्या करूँ

अचंभित हूँ, कुछ समझ में नहीं आता, मजबूर हूँ, विवश हूँ

क्या कहीं

۔ (مجبوری اور بے بسی ظاہر کرنے کے لئے) کیا بیان کریں۔ کیا شکایت کریں۔ قابل بیان نہیں۔ (درد) ہوا جو کچھ کہ ہونا تھا۔) کہیں کیا جی کو رو بیٹھے۔

क्यूँकर

because, why

हक़ाइक़-आगाह

حقیقتوں کا جاننے والا، عارف.

हक़ाइक़-आगाह

حقیقتوں کا جاننے والا، عارف.

क्या काम

कुछ काम नही, संबंध या उद्देश्य नहीं

क्या ख़ाक

ख़ाक नहीं, कुछ नहीं, क्यों कर, कैसे, किस उमीद पर

क्या ख़बर

कुछ ख़बर नहीं, मालूम नहीं, क्या मालूम

क्या क्या कुछ

کیا کچھ، بہت کچھ

कोई-कोई

इक्का दुक्का, बहुत कम, एक आध, ख़ाल-ख़ाल

क्या कहता है

(तरदीद के मौक़ा पर मुस्तामल) ये बात दरुस्त नहीं, क्या बात कहता है य इकया इल्ज़ाम लगाता है

क्या ख़ूब सौदा नक़्द है इस हाथ दे उस हाथ ले

जैसा करोगे वैसा भरोगे

क्या कहा है

(प्रशंसा के अवसर पर) क्या अच्छी कविता कही है, वाह वाह, सुबहान अल्लाह

क्या क्या कहेगा

सब कुछ कह देगा, कुछ नहीं छुपाएगा, बढ़ा-चढ़ाकर कहेगा (राज़ खुल जाने के डर से कहते हैं)

क्या कीजे

हैरान हैं, कुछ समझ में नहीं आता, क्या करें, महबोर हैं

क्या कहना है

(तहसीन नीज़ तंज़ के लिए मुस्तामल) सुबहान अल्लाह, वाह वाह, कोई जवाब नहीं, बहुत ख़राब है, बहुत ख़ूब है

क्या करता है

ऐसा ना कर, बेजा फे़अल करता है, ना कर, बाज़ रह , किया मशग़ला रखता है, क्या काम करता है

क्या ख़ुदा है

ऐसा शख़्स नहीं जिस से सरताबी ना हो सकती हो

क्या क़ुदरत

इतनी क़ुदरत नहीं है, क्या मजाल, क्या ताब

क्या ख़ुदाई है

ईश्वर की महिमा और शक्ति का क्या कहना, इश्वर की क्या महिमा है (आश्चर्य, व्यंग और ताना के लिए बोलते हैं)

क्यूँकि

कारण यह कि, इसलिए कि, चूँकि

क्या खट राग गाते हो

क्या बकवास करते हो, क्या बेहूदा बकते हो

क्या क्या इरादे थे

बहुत इरादे थे, हसरत न निकली

क्या ख़ूब

बेशतर शेअर की तारीफ़ में मुस्तामल

क्या कत्ता है

क्या बाजी है

कया कुत्ते ने काटा था

सर नहीं फिरा था, दिमाग़ नहीं चल गया था

क्या क्या गुज़रा

क्या क्या मुसीबत पेश आई, क्या क्या वाक़िया पेश आया

क्या ख़ातिर

किस वास्ते, किस लिए

क्या खाए

۔ کس برتے پر۔ بھلا ہم غریب آدمی کو ایسی ویسی باتوں کی کیا قدر میکے سے سُسرال تک نون تیل لکڑی ہی سے زمانہ فرصت نہیں دیتا۔ بھلام ہم دوسری کی بات کی کیا خبر سکتے ہیں اور کیا کھا کے کوئی بات کرسکتے ہیں۔

किए की सज़ा पाना

۔ بُری فعل کی سزا پانا۔ ؎

किए की सज़ा पाना

रुक : किए को पाना

क्या खा के

کس بِرتے پر ، کس طرح .

क्या ख़ूब आदमी था

जब किसी अच्छे व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी प्रशंसा की जाती है, तो यह वाक्य उसकी प्रशंसा में कहा जाता है (कुछ लोग ज़ौक़ के पूरे मिसरे को पढ़ते हैं)

क्या ख़ूब आदमी था

۔کسی اچھّے آدمی کا اُس کے مرجانے کے بعد ذکر کرتے ہیں تو یہ کلمہ اس کی تعریف میں کہتے ہیں۔ ؎

क्या कंदा कर सकता है

क्या नुक़्सान पहुंचा सकता है

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