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कुछ और 'आलम है

कुछ और ही 'आलम होना

दगरगों होना, हालत में तबदीली आना

और-'आलम

परम्परा से बदला हुआ रंग या हाल, पहले से बदली हुई स्थिति, मदहोश

और-कुछ

अलग, मुख़्तलिफ़, पहले से बदला हुआ, कुछ अलग

'अक़्ल की कोताही और सब कुछ है

उपहास में मूर्ख या कम समझ वाले के संबंध में कहते हैं कि और तो सब कुछ है मगर 'अक़्ल नहीं है

'अजब 'आलम है

तुरफ़ा बिहार है, अजीब हालत है

कुछ-है

۔۱۔कोई बात है। कोई अंदरूनी बात है। ए २।देखो कुछ नंबर ३।३।बुराई है। खोट है। फ़ासिद ज़दा है। इस के दिल में कुछ है

शेर-ए-क़ालीं और है, शेर-ए-नीस्ताँ और है

बहादुरी का अमलन इज़हार और चीज़ है और बहादुरी की बातें करना और चीज़ है

रंग-ढंग कुछ और होना

हालत दूसरी होना, नक़्शा दूसरा होना, नया अंदाज़ होना

कुछ ख़ैर है

(हैरत और ताज्जुब की जगह मुस्तामल) कुछ पता नहीं , बेख़बर है

और कुछ नहीं तो

पीछे कुछ और मुँह पर मुमानी

मुंह पर तारीफ़ और ग़ीबत में बुराई

ये गूए और ये मैदान है

आईए अभी मुक़ाबला हो जाये, यानी जब कोई हैसियत से बढ़कर दावा करता है तो उसे नीचा दिखाने के वास्ते कहते हैं

ये वक़्त और है

वक़्त गुज़र जाने के बाद पिछले वक़्त को याद करते हुए कहते हैं, अच्छे दिनों को याद करते हुए कहते हैं

कुछ चीज़ है

कोई महत्व है, कोई एहमियत है, कोई हैसियत है

कुछ ख़लल तो है जिस से ये ख़लल है

इस ख़राबी या कमी का कोई कारण है, कहीं कुछ गड़बड़ी तो ज़रूर है, जिससे यह सब हो रहा है

रंग कुछ और होना

अंदाज़ बदल जाना, तौर तरीक़े में तबदीली आना

कुछ अपनी ख़बर है

क्या अपनी स्थिति का एहसास है

ये कुछ खेल है

ये आसान नहीं है ये बेदसतूर है

यूँ भी है और यूँ भी

इस तरह भी है इस तरह भी (ज़ौ मानी बात कहने के मौक़ा पर मुस्तामल)

कुछ ख़र्च होता है !

इख़तियार आने ना आने में है जबर इस में नहीं कुछ ख़र्च होता है हाँ मुँह से फ़रमाते हुए

कुछ हैं

किसी योग्य हैं, किसी शुमार में हैं, किसी संख्या में हैं

हर एक बात की कुछ इंतिहा है

(कोई किसी झगड़े को तूल दे तो कहते हैं) हर बात कहीं ना कहीं ख़त्म होती है

ये भी कुछ हैं

इन की भी कोई हैसियत है, ये भी इज़्ज़त और मर्तबा रखते हैं

एक हुनर और एक 'ऐब सब में होता है

हर आदमी में कोई न कोई गुण और अवगुण होता है, कोई व्यक्ति नितांत बेकार या बे-ऐब या निर्दोष नहीं होता

कुछ नहीं आता है

बात ये और है

मामला यह बिल्कुल अलग है, मसला ही दूसरा है

ये और बात है

۔ये बात जुदा है।

परिस्तान का 'आलम है

इन्दर का उखाड़ा उतरा हुआ है, बहिश्त का सा लुतफ़, बड़ी कैफ़ीयत आरही है

कुछ-कुछ

ज़रा ज़रा, थोड़ा सा, थोड़ा थोड़ा, लगभग, तक़रीबन, थोड़ा बहुत

कुछ नहीं हो सकता है

डोला आता है और जनाज़ा जाता है

शरीफ़ ज़ादी इज़्ज़त-ओ-एहतिराम से ब्याह कर घर में आती है और मर कर निकलती है

दिमाग़ कुछ और हो जाना

इतराने लगना, सीधे मुँह बात न करना

दुनिया है और ख़ुशामद है

दुनिया में ख़ुशामद के काम चलता है, दुनिया के लोग ख़ुशामद को पसंद करते हैं

है हुवाए कुछ भी नहीं

बिलकुल नादार है, बिलकुल मुफ़लिस है

'आलम 'आलम

पुरा विश्व, सब लोग, पुरी दुनिया

दिल का कुछ और ही नक़्शा है

दिल घबराता है, दिल परेशान है

दिल का कुछ और ही नक़्शा है

दिल घबराता है, दिल परेशान है

कुछ बसंत की भी ख़बर है

दुनिया के स्थितियाँ की भी सूचना है, सावधान करने के लिए बोलते हैं, जब कोई व्यक्ति किसी आगे वाली विपत्ति से अनभिज्ञ हो कर उल्लास मनाने में व्यस्त हो तब प्रायः उस से व्यंग्य में कहते हैं, जिसे सचमुच ही किसी शुभ अवसर के आने की सूचना न हो, उस से भी कह सकते हैं

आज मैं हूँ और वो है

कोई दक़ीक़ा दारू गीर और मुवाख़िज़े का उठा ना रखूंगा

ज़रूरत सब कुछ करा लेती है

ज़रूरत के वक़्त जो कुछ हो सकता है किया जाता है, नेकनामी बदामी की कुछ पर्वा नहीं होती

बनिये का बहकाया और जोगी का फटकारा ख़राब होता है

आती है हाथी के पाँव और जाती है च्यूँटी के पाँव

बीमारी के संबंधित कहते हैं कि चुपके से और जल्दी से आजाती है और धीरे धीरे जाती है

कुछ गिरह में भी है

कुछ दाल में काला है

किसी छुपी बात का संदेह होना, तह में अवश्य कुछ है जो ज़ाहिर में नहीं

कुछ पड़ा पाया है

जब किसी आदमी को बगै़र किसी ज़ाहिरी सबब के ख़ुश देखते हैं तो ये फ़िक़रा कहते हैं इस का मतलब ये होता है कि क्या ग़ैब से कोई नेअमत हाथ आगई

चोर और साँप दबे पर चोट करता है

चोर और साँप घिर जाएँ अथवा दब जाएँ तो हमला करते हैं वर्ना भाग जाते हैं

दिल का कुछ और नक़्शा होना

कुछ गेहूँ गीले कुछ जाँगर ढीले

'आलम-'आलम होना

तरह तरह की कैफ़ीयत रौनुमा होना, नौ बह नौ कैफ़यात का ज़ाहिर होना

'आलम-ब-'आलम

ज़ालिम की चाल ही और है

ज़ालिम के तरीक़े मुख़्तलिफ़ होते हैं

कुछ-ईंट

ज़ाहिर कुछ बातिन कुछ

मुँह से कुछ का कुछ निकलना

राजा का परचाना और साँप का खिलाना बराबर है

बादशाहों और हुकमरानों की मुसाहिबत में हरवक़त ख़तरा होता है

साँप और चोर की धाक बुरी होती है

लोग उन के नाम से डरते हैं

कुछ खो के सीखते हैं

हानि उठा कर के ही सीख मिलती है, आदमी ठोकर खाकर ही सीखता है

कुछ-नहीं

कोई हैसियत या एहमीयत नहीं, कोई बात नहीं, नामुनासिब है

मुँह पर कुछ पीठ पर कुछ

हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में कुछ और 'आलम है के अर्थदेखिए

कुछ और 'आलम है

kuchh aur 'aalam haiکُچھ اور عالَم ہے

کُچھ اور عالَم ہے کے اردو معانی

 

  • ۔حالت اور کیفیت بدل گئی۔ ؎

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